दे धक्का, साथी हाथ बढ़ाना…

`साथी हाथ बढ़ाना.. एक अकेला थक जाए तो सब मिलकर बोझ उठाना’। फिल्म `नया दौर’ का यह गाना इन दिनों देश की पहली मोनो रेल पर बेहद सटीक बैठ रहा है। चेंबूर-वडाला-जैकब सर्कल रूट पर मोनो रेल का परिचालन ४ मार्च से पूरी तरह से शुरू हो गया है लेकिन मोनो रेल की स्थिति अभी भी दे धक्कावाली ही बनी हुई है। हर बार की तरह बुधवार को भी जब मोनो रेल ने बीच सफर में यात्रियों को धोखा दे दिया तो एक बार फिर मोनो को दूसरी मोनो रेल की मदद से धक्का देने की नौबत आ गई।
मोनो रेल से सफर करनेवाले यात्रियों का दिन कल बेहद परेशानियों भरा रहा। दरअसल वडाला डिपो के पास मोनो रेल तकनीकी खराबी के कारण कल फिर एक बार बंद पड़ गई। यह घटना सुबह १० बजे हुई। इस दौरान मोनो डार्लिंग बीच रास्ते में ही घंटों खड़ी रही। ट्रेन में सफर कर रहे सैकड़ों यात्री डर के मारे परेशान होने लगे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब मोनो रेल नहीं शुरू हुई तो दूसरी मोनो रेल की मदद से धक्का देकर खराब हुई मोनो को यार्ड में लाया गया। इस दौरान मोनो रेल के रूट पर एक भी सेवा संचालित नहीं हो पाई, वहीं कल एमएमआरडीए के प्रवक्ता दिलीप कवठकर ने एक बयान जारी कर कहा कि मोनो रेल (आरएसडी-४) में पावर फेल होने के कारण मोनो को बीच रास्ते से ही डिपो में भेज दिया गया। इस दौरान सुबह १० से १०.४५ बजे तक लगभग ४४ मिनट मोनो रेल का परिचालन थमा रहा। १०.४५ बजे के बाद मोनो रेल की सेवा दोबारा सुचारु रूप से चलने लगी। बीच रास्ते में बंद पड़ी मोनो रेल को (आरएसटी-०६) की मदद से धक्का मारकर वडाला डिपो ले जाया गया।
४ मार्च से शुरू हुआ था दूसरा चरण
४४ मिनट तक खड़ी रही मोनो