" /> दो दि‍न से कब्र की आस में पेड़ के नीचे पड़ी रही बंजारन की लाश

दो दि‍न से कब्र की आस में पेड़ के नीचे पड़ी रही बंजारन की लाश

कहतें हैं इंसान के साथ कितने लोग हैं यह बात उसकी मौत पर पता चलता है। उसके घर जनाज़े में शामिल होने कितने लोग आते हैं या शव को कंधा देने में कितने लोगों को तत्परता रहती है। इसके अलावा परदेस में जब किसी की मौत होती है तो उस समय भी इंसानियत के पुजारी लोगों की मदद करते हैं पर वाराणसी में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जब एक बंजारा परिवार की मृत महिला के शव को गांव वालों ने दफनाने से इंकार कर दिया।

इस संबंध में प्रशासनिक अमले ने भी खूब माथापच्ची की लेकिन कुछ हल नहीं निकला। फिलहाल आज तीसरे दिन समाचार लिखे जाने तक उक्त महिला के शव को मुस्लिम समुदाय ने अपने कब्रिस्तान में दफन करने की अनुमति दे दी है और शाम तक मृतका को सुपुर्दे ख़ाक कर दिया गया। वहीं इस मामले में तहसीलदार राजातालाब नीलम उपाध्याय ने बताया कि ग्राम प्रधान खुद इस मामले में राजनीति कर रहे हैं, क्योंकि इस परिवार के पास मिर्जापुर का आधार कार्ड है तो वहां ले जाकर दफनाना चाहिए।

रोहनिया थानाक्षेत्र के काशीपुर गांव में पिछले कई वर्षों से बंजारों का परिवार रहता है। ये खानाबदोश सड़कों पर करतब दिखाकर अपना और पाने परिवार का पेट पालते हैं। मूलतः मिर्ज़ापुर के रहने वाले इन बंजारों को गांव के बाहर ग्राम प्रधान ने अपनी ज़मीन पर आशियाना लगाने की अनुमति दी हुई है। दो दिन पहले इसी परिवार की एक बुज़ुर्ग महिला की मौत हो गयी। इसके बाद बंजारों ने गाँव में स्थित कब्रगाह में उक्त महिला के शव को दफनाने की क्रिया शुरू की और कब्र भी बनवानी शुरू कर दी। परिजनों के अनुसार इस सूचना पर गांव वालों ने हमें मना कर दिया और कब्र में वापस से मिटटी भर दी।

काशीपुर के लोगों ने विरोध शुरू किया तो बात जंगल की आग की तरह फैली और प्रशासनिक अमले के कानो तक पहुंची। ग्राम प्रधान ने विरोध के बाद तहसील के उच्चधिकारियो और पुलिस को इस सम्बन्ध में फोन किया। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार राजातालाब नीलम उपाध्याय के नेतृत्व में पहुंचे तहसील कर्मियों ने ग्राम समाज की जमीन की नापी भी करा दी, लेकिन इसके बाद भी लोग वहां दफनाने के लिए सहमत नहीं हुए और उन्हें वापस जाना पड़ा।

इस तरह दो दिन बीत चुके थे और शव बाग़ में ही पेड़ के नीचे चारपाई पर पड़ा हुआ था। इस सम्बन्ध में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इन बंजारों को ग्रामा प्रधान ने बसाया है और पूर्व में हुई एक मौत पर ग्राम प्रधान ने कहा था कि अब कोई दफन नहीं होगा और उसके बाद उस वृद्ध को दफन करवाया गया था।

गांव के लोग अब इस महिला को कब्रगाह में दफनाने के लिए सहमत नहीं हो रहे थे। मृतक महिला के परिवार वाले मोहनसराय स्थित कब्रगाह पर बात करने गए जहां समस्या सुनकर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने यहां दफनाने की इजाजत दे दिए और आखिरकार शुक्रवार की शाम तक महिला को दफनाने की सहमति बन सकी।