दो पैडल, एक पैर कर डाली खतरनाक सैर

यूं तो हम सैर करने के कई किस्से सुनते रहते हैं। कोई अकेले समुद्री यात्रा पर विश्व भ्रमण के लिए निकल जाता है तो कोई मोटरसाइकिल से दुनिया नापने का संकल्प लेता है लेकिन एक दिव्यांग डॉक्टर ऐसा है, जिसने दिलेरी दिखाते हुए न सिर्फ एक कठिन संकल्प को पूरा किया बल्कि लोगों को स्वास्थ्य का संदेश भी दिया कि डायबिटीज को दूर भगाना हो तो साइकिल अवश्य चलाएं।
बता दें कि डायबिटीज पर जागरूकता के लिए दिल्ली से मुंबई तक की साइकिल द्वारा यात्रा करनेवाले साइकिल सवारों का मुंबई में सम्मान किया गया। बोरीवली स्थित ज्ञान सागर एंफी थियेटर में दिल्ली से मुंबई तक की १,५०० किलोमीटर की यात्रा तय करनेवाले ३० साइकिल सवारों का एक भव्य कार्यक्रम बोरीवली रोटरी क्लब ने आयोजित किया, जिसमें रोटरी इंटरनेशनल डायरेक्टर डॉ. भरत पंड्या के हाथों साइकिल सवारों योगेंद्र सिंह, चंदन बजाज, रतन अंकोले, प्रतिभा, प्राची सिंतरे आदि को सम्मानित किया गया। ६० वर्षीय सपिंदर सिंह का उत्साह बड़ी उम्र में भी देखते बनता था। साइकिल यात्रा के दौरान जयपुर से ब्यावर की सड़क की कठिन चढ़ाई के अनुभव दिव्यांग डॉ. राजू तुरखाने ने सुनाए। एक पैर से साइकिल चलाकर ऐसी खतरनाक चढ़ाई को पार करना बहुत ही कठिन था, जहां वाहनों को भी कम गियर में चलाना पड़ता है। कार्यक्रम के संयोजक अजय गांधी ने बताया कि आनेवाले दिनों में भी डायबिटीज के प्रति जागरूकता को लेकर अनेक कार्यक्रम किए जाएंगे। इस अवसर पर नरेंद्र शाह, प्रफुल्ल शर्मा, अविनाश गुजराती सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि साइकिल चलाने से घुटने मजबूत होते हैं। स्टेमिना बढ़ता है। वजन कम होता है और पाचन भी ठीक रहता है।