दो मिनट की देरी एक साल बर्बाद

मुंबई में एमपीएससी की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों को बड़ी यातना झेलनी पड़ी। परेल स्थित महर्षी दयानंद कॉलेज (एम. डी. कॉलेज) परीक्षा केंद्र पर पहुंचने में विद्यार्थियों को दो मिनट की देरी क्या हुई, वहां मौजूद अधिकारी ने उसे परीक्षा में बैठने ही नहीं दिया। परीक्षार्थियों को कॉलेज के गेट पर ही खड़ा रखा गया। अधिकारी के अड़ियल रवैया के चलते लगभग १० से १२ विद्यार्थियों का साल बर्बाद हुआ।
बता दें कि एक ओर गुर्जर आंदोलन, दूसरी ओर रविवार का मेगाब्लॉक जैसी अनेक अड़चनों का सामना करते हुए कल परीक्षार्थी मुंबई सहित पुणे और दिल्ली से पहुंचे थे। सुबह १० बजे से परीक्षा शुरू होनी थी लेकिन ९.३० बजे ही गेट बंद कर दिया गया। दो मिनट बाद ही परीक्षार्थी गेट पर पहुंचे लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया और कहा गया कि वे लेट हो गए हैं। परीक्षार्थियों ने काफी विनती की लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। परीक्षा केंद्र के अधिकारी रजनीकांत जाधव ने उनकी एक न सुनी।
पुलिस ने भी मध्यस्थता करने की कोशिश की लेकिन वह सुनने को ही तैयार नहीं थे। परीक्षार्थियों के प्रवेश न देने की बात का पता चलते ही शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत, विधायक अजय चौधरी, शिवसेना सचिव सूरज चव्हाण और पुणे जिला संपर्क प्रमुख बाला कदम ने कॉलेज में जाकर जाधव से बात की लेकिन अधिकारी टस-मस नहीं हुआ। जिसके बाद सभी ने लोकसेवा आयोग के चेयरमैन चंद्रशेखर ओक से संपर्क किया। काफी प्रयत्नों के बाद परीक्षार्थियों को दूसरा पेपर देने की अनुमति दी गई। इस संदर्भ में एमपीएससी के एक्टिंग चेयरमैन चंद्रशेखर ओक ने `दोपहर का सामना’ से कहा ‘ परीक्षार्थियों के हाल टिकट पर साफ तौर पर लिखा गया था कि उन्हें ८.३० बजे रिपोर्ट करना है, ९ बजे से ९.३० बजे तक ही एंट्री मिलेगी। इसके बावजूद कुछ विद्यार्थी देरी से केंद्र पहुंचे इसलिए नियमानुसार उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। राज्यभर में ३ लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी लेकिन मुंबई के इसी कॉलेज में परीक्षार्थी देरी से पहुंचे।

परीक्षार्थी निराश
पुणे से आए परीक्षार्थी शाबाज अंसारी ने कहा कि ९.३१ बजे मैं कॉलेज की गेट पर था लेकिन मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया। पुलिस ने भी परीक्षा केंद्र के अधिकारी को समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने एक न सुनी। मेरा तो एक साल बर्बाद हो गया। अन्य कॉलेजों में ९.४५ बजे तक परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया फिर हमारे साथ इतनी कठोरता क्यों? एमपीएससी को हमें एक मौका देना चाहिए।