" /> धनगर आरक्षण के लिए जो संभव होगा वो सब करेंगे! – मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

धनगर आरक्षण के लिए जो संभव होगा वो सब करेंगे! – मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

धनगर समाज के लिए किए गए प्रावधान में किसी भी प्रकार की कमी नहीं की जाएगी। इसके लिए सरकार कटिबद्ध है। धनगर समाज को आरक्षण देने के लिए जो संभव होगा, वह सब सरकार करेगी। केंद्र के पास जाना होगा तो हम सब एक साथ केंद्र के पास जाएंगे, ऐसा एलान कल विधानपरिषद में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया। धनगर आरक्षण को लेकर कल प्रश्नोत्तर काल के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के कारण सदन का कामकाज पहले पांच मिनट उसके बाद दस मिनट के लिए स्थगित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सभागृह में उपस्थित थे। मंत्री उत्तर दे रहे थे परंतु विपक्ष मुख्यमंत्री को उत्तर देने के लिए अड़ा हुआ था और हंगामा कर रहा था। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमें मुद्दों का हल निकालना चाहिए या सिर्फ शोर मचाकर खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करनी चाहिए। यह एक बार में तय कर लो।

धनगर समाज की कई पीढ़ियां आरक्षण से वंचित रही हैं। आजादी के ७५ साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसा होने के बाद भी क्या हम सच में समाज के वंचित तबके तक पहुंच पाए हैं? एक दूसरे से तू-तू, मैं-मैं करने की बजाय मूल प्रश्न समझाएं। लोगों को यह समझना पड़ेगा कि यह मामला केंद्र के अधीन है। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे कहते थे कि जातियों की उपजातियां होती हैं परंतु पेट की कोई जाति नहीं होती। इस विषय पर राजनीति मत करो। हम सबको मिलकर एक साथ केंद्र सरकार के पास जाना चाहिए। पांच सालों में धनगर समाज के कई नेता मुझसे मिले हैं। यह मामला अभी अदालत में है और अदालत में प्रतिज्ञापत्र दाखिल किया गया है। ऐसा एलान कल विधानपरिषद में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने किया।
इस सवाल पर चर्चा में भाग लेते हुए कई सदस्यों ने पूछा कि आदिवासी समाज की तर्ज पर धनगर समाज को सुख-सुविधा और योजना के लिए एक हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, वो निधि समाज को मिली क्या? सदस्यों के सवाल पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि समाज के लिए निधि की कमी नहीं पड़ने दी जाएगी। धनगर समाज हमारा है। इसके लिए जो-जो हो सकेगा, वह सब सरकार करेगी। कानूनी तौर पर सब कुछ करेंगे। आरक्षण के मुद्दे पर हम सब एक साथ हैं। आवश्यकता पड़ने पर हम सब केंद्र के पास एक साथ जाएंगे और जो इससे वंचित हैं, उनके साथ न्याय करेंगे। ऐसा आश्वासन देने पर दोनों तरफ के सदस्यों ने मुख्यमंत्री की पहल का स्वागत किया।
अपराध वापस लेंगे!
धनगर आरक्षण आंदोलनकारियों पर दर्ज हुए मामले वापस लेने की मांग विधायक शरद रणपिसे ने की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री एड. अनिल परब ने कहा कि मराठा समाज व भीमा कोरेगांव की तर्ज पर धनगर आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे। जो गंभीर मामले हैं, उनकी जांच करके निर्णय लिया जाएगा। यह सरकार की नीति है।
पुलिस कॉलोनियों के लिए सरकार दे रु. ३०० करोड़
पुलिसवाले और उनके परिजन खतरे में जी रहे हैं क्योंकि शहर की ज्यादातर पुलिस कॉलोनियों की हालत बहुत खस्ता है। सरकार को पुलिस कॉलोनियों के रखरखाव व रिपेयरिंग के लिए तत्काल ३०० करोड़ रुपए का प्रावधान करना चाहिए। विधानसभा में यह मांग भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष एवं मलबार हिल के विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने की।
रिपोर्ट निर्धारित समय में मिलेगी -गृह राज्य मंत्री
गोवंश हत्या मामले में मांस को जांच के लिए राज्य की प्रयोगशाला में भेजा जाता है। यह जांच की रिपोर्ट निश्चित कालावधि में मिलेगी, ऐसी जानकारी गृह राज्यमंत्री शंभूराज देसाई ने विधानसभा में दी। रत्नागिरी जिले चिपलूण तालुका के पिंपली खुर्द, पायरवण में २१ जनवरी को गोवंश हत्या का मामला प्रकाश में आया था। इस मामले को भास्कर जाधव व अन्य सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उपस्थित किया था। इस प्रकरण में आठ लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, जिनमें से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस के दो विशेष दल बनाए गए हैं।
३५५ एकड़ जमीन पर बनेंगे सस्ते घर -राजस्व मंत्री
विधानसभा में राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने कहा कि विक्रोली से मुलुंड इलाके की कुल नमक जमीन में से ३५५ एकड़ जगह पर आम लोगों के लिए सस्ते घर बनाने की केंद्र सरकार की योजना है। इस दृष्टि से वृहद प्रारूप तैयार करने के लिए सरकार ने मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण को नियुक्त किया है। इस पर निगरानी और नियंत्रण रखने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकारी समिति गठित की गई है और इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद परियोजना लागू की जाए या नहीं, इस बारे में उचित निर्णय लिया जाएगा। कल विधानसभा में विक्रोली से लेकर मुलुंड तक स्थित नमक की जगह पर किफायती घर देने के संदर्भ में अमित साटम ने सवाल किया था। इसके उत्तर में राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात ने कहा कि इस परिसर में नमक के ४० खेत हैं, इसमें से ३५५ एकड़ जमीन पर विकास कार्य किए जा सकते हैं। इस क्षेत्र में सामान्य लोगों को किफायती घर उपलब्ध कराने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है। नमक की यह जमीन केंद्र और राज्य सरकार के स्वामित्व में है इसलिए इस भूमि के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से एक नीति तय की जाएगी। इस जमीन के सर्वेक्षण का काम आईआईटी मुंबई को दिया गया है, जो इसका जियोलॉजिकल सर्वेक्षण कर रही है। साथ ही ३४ एकड़ जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियों का अतिक्रमण है। थोरात ने कहा कि इस संबंध में सभी निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चाधिकार समिति की रिपोर्ट आने के बाद लिए जाएंगे। चर्चा में रविंद्र वायकर, प्रताप सरनाईक, सुनील प्रभु तथा रईस शेख आदि ने भाग लिया।