धर्म का नाम अधर्म का काम, मिशनरियों की काली करतूत

 निशाने पर उल्हासनगर के सिंधी
 डेढ़ लाख से अधिक सिंधी बने ईसाई
 महिलाओं को पहले फांसते हैं
देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले सिंधी समुदाय के लोग भारी पैमाने पर धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। इसे लेकर पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए पुराने सिंधी समुदाय के लोगों में चिंता व्याप्त है कि जिस धर्म के लिए वे अपनी जन्मभूमि, संपत्ति सहित सब कुछ छोड़कर हिंदुस्थान आए, उसी हिंदुस्थान में सिंधी समुदाय की नई पीढ़ी धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन रही है। सिंधी समुदाय के लोगों को धर्म परिर्वतन कराने में ईसाई मिशनरियों के लोग बड़ी सोची समझी साजिश के तहत काम कर रहे हैं। ईसाई मिशनरियां सिंधी समुदाय के लोगों का धर्म परिवर्तन करते समय किसी के भी नाम या सरनेम में परिवर्तन नहीं करती। जिस नाम और सरनेम में वे रहते हैं, उसी पुराने रूप में ईसाई बन सकते हैं यानी नाम के साथ गेम करके धर्मपरिवर्तन का खेल खेला जा रहा है।
बता दें कि सिंधी समुदाय के लोग व्यवसाय क्षेत्र से जुड़े होने के कारण वे व्यवसाय पर अधिक ध्यान देते हैं। दोपहर को घर से निकलने के बाद वे देर रात को ही घर लौटते हैं। इसका फायदा उठाकर ईसाई मिशनरियों से जुड़ी महिलाएं सिंधी समुदाय के घरों में घुस जाती हैं और अंधश्रद्धा का सहारा लेकर उन्हें तरह-तरह का प्रलोभन देती हैं। इन प्रलोभनों में सबसे अधिक बीमारी के ठीक होने और कारोबार-धंधे में बरकत होने जैसी बातों को लेकर महिलाओं को आकर्षित करती हैं। जब महिलाएं ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आ जाती हैं तो पुरुष अपने आप ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंस जाते हैं। उल्हासनगर मनपा गुटनेता जमनु पुरस्वानी के मुताबिक ईसाई बने सिंधियों के घर में हिंदू सिंधी समुदाय के लोग जाकर शादी कर लेते हैं क्योंकि ईसाई बने सिंधी न तो नाम और न ही सरनेम बदलते हैं। शादी के बाद पता चलता है कि यह परिवार तो ईसाई बन चुका है। परिणामस्वरूप हिंदू घर से गई लड़की भी ईसाई बनने को मजबूर हो जाती है।