धारावी फिर ‘धराशायी’

 टेंडर में नहीं आए बिल्डर
 अवधि १५ दिनों के लिए बढ़ी

विश्वस्तर पर धारावी पुनर्विकास के लिए मंगाए गए टेंडर में बिल्डरों ने पुन: पीठ दिखाई है। विशेष दर्जा प्राप्त धारावी पुनर्विकास के लिए पिछले महीने टेंडर निकाला गया था, जिसमें मात्र एक बिल्डर ने रुचि दिखाई थी मतलब धारावी फिर ‘धराशायी’ हो गई। अधिक प्रतिसाद मिलने की आशा में ‘धारावी विकास प्रकल्प’ ने टेंडर की अवधि आठ जनवरी तक बढ़ा दी थी किंतु कल पुन: ‘टांय-टांय फिस्स’ हो गया। एक भी बिल्डर ने टेंडर नहीं भरा। हालांकि धारावी विकास प्रकल्प ने हिम्मत नहीं हारी है, उसने पंद्रह दिनों की अवधि और बढ़ा दी है। बता दें कि ये दोनों सरकारों के कार्यकाल में धारावी पुनर्विकास के लिए पांचवी बार टेंडर निकाला है। नतीजा जस का तस है। गौरतलब है कि ‘धारावी विकास प्रकल्प’ ने धारावी पुनर्विकास के लिए २००४ से कई योजनाएं लाई। दस सेक्टर की बजाय पांच सेक्टर में धारावी को तब्दील किया गया। बावजूद धारावी के विकास के लिए एक भी बिल्डर आगे नहीं आया और विकास परियोजना के तामझाम में करोड़ों रुपए सरकार ने फूंक डाले। आघाड़ी सरकार के दौरान धारावी का तीन बार टेंडर निकला था किंतु एक भी बिल्डर नहीं आया। मजबूरन म्हाडा ने सेक्टर पांच का पुनर्विकास स्वयं करना शुरू किया, जिसके अंतर्गत इमारतें बनाई गर्इं और उसी सेक्टर में दो इमारतों का निर्माण जारी है। धारावी विकास प्रकल्प को विशेष दर्जा देने के बाद भी कोई बिल्डर आने को तैयार नहीं है। टेंडर की अवधि बढ़ाई जा रही है लेकिन बिल्डरों ने धारावी से दूरी बना रखी है।