" /> धुलेंडी में धुल गया कोरोना का खौफ!

धुलेंडी में धुल गया कोरोना का खौफ!

चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस का खौफ दुनिया में है। हिंदुस्थान भी इससे अछूता नहीं है। महाराष्ट्र में भी कुछ लोग कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हुए हैं। ऐसी खबर आने के बाद मुंबईकर भी कोरोना के खौफ में देखे जा रहे थे। इसी बीच कोराना वायरस को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म होने से माना जा रहा था कि इस बार की होली कोरोना के खौफ के कारण खराब हो जाएगी। लेकिन हमेशा हर धर्म के त्यौहार को बड़े ही हर्षोल्लास से मनानेवाले मुंबईकरों के बीच कोरोना का खौफ धुलेंडी में धुल गया। मुंबईकरों ने कोरोना को भुलाकर कल जमकर होली खेली। कल दक्षिण मुंबई के कोलाबा, मरीन ड्राइव, गिरगांव, परेल, दादर से लेकर जुहू तक मुंबईकर पूरी तरह से होली के रंग में डूबे हुए थे और उन्होंने जमकर होली खेली।

होली के दिन कल समूचा मुंबई शहर रंगोत्सव में जगह-जगह थिरकता नजर आया। जगह-जगह ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं…’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर लोग थिरकते देखे गए। मुंबई ही नहीं बल्कि उपनगरों के अलावा नई मुंबई, ठाणे, डोंबिवली, कल्याण, भिवंडी आदि आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों ने एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाया। लोग सुबह से ही रंग, गुलाल लेकर निकल पड़े अपनों को होली के रंग में रंगने के लिए और यह कल शाम तक जारी रहा। इस दौरान लोगों के समूह ढोल बजाते हुए और होली गीत गाते हुए एक दूसरे को गले लगाकर बधाई देते दिखाई दिए। कई जगह पर लोगों ने इकोप्रâेंडली कलर के साथ होगी खेली।
इस बार होली पर कई लोगों ने पानी के बचत का संदेश देने के लिए बड़े बैनर लगाकर पानी से होली न खेलने का अनुरोध लोगों से किया। कई लोगों ने केवल गुलाल और तिलक लगाकर होली मनाई। विभिन्न इलाकों में ढोल नगाड़ों एवं डीजे पर युवाओं की टोलियां थिरकती नजर आई। सूखी होली की अपील के बावजूद कई स्थानों पर जब पब्लिक के दिलोदिमाग पर होली की मस्ती चढ़ी तो न केवल जमकर रंग बरसाए बल्कि कुछ जगहों पर रेन डांस जैसे आयोजन भी हुए। सड़कों, गलियों से लेकर हाउसिंग सोसाइटियों, झुग्गी-बस्तियों में कोरोना को दरकिनार कर लोग समूहों में एक दूसरे पर रंगों की बरसात के साथ होली की मस्ती में डूबते नजर आए। कई जगहों पर सामूहिक रंगोत्सव आयोजित हुए, जहां भांग व ठंडई के अलावा शराब के नशे में भी तमाम लोग धुत दिखे। हालांकि, सड़कों पर जगह जगह पुलिस का बंदोबस्त था और गुब्बारे में रंग भरकर लोगों को घायल करनेवालों पर भी कड़ा पहरा देखा गया। इसके अलावा ड्रंकन ड्राइवर्स पर भी ट्रैफिक पुलिस की नजर थी। इस बार इकोप्रâेंडली होली के प्रति लोगों का रुझान था, जिसके तहत हर्बल रंगों को तरजीह दी जा रही थी। इसके अलावा कुछ जागरूक लोगों ने फूलों की होली भी खेली। समाज का हर तबका अपने-अपने तरीके से रंगोत्सव का लुत्फ उठाता नजर आया, बच्चों ने आपस में तो होली खेली ही, राह चलते लोगों पर भी पिचकारियों से रंग-बिरंगी होली का हमला बोला। गृहिणियों ने पकवान आदि बनाने के बाद खाली होकर झुंड बनाया और निकल पड़ी रंगों में डूबने और सहेलियों को डुबोने के लिए। यह सिलसिला दोपहर बाद था, फिर कुछ लोग घरों का रुख किए, तो बहुसंख्यक वर्ग समुद्री बीचों की ओर बढ़ चला। फिर, शाम को जब रंगों की खुमारी कुछ कम हुई, फिर पब्लिक निकल पड़ी एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर और गले मिलकर बधाइयां देने।