नक्सली हमले पर नेताओं में आक्रोश

नक्सली हमले को समाप्त करने के लिए तीव्र गति से प्रयत्न किया जाएगा। नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा, ऐसी चेतावनी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी। गडचिरोली में पुलिस दल पर हुए नक्सली हमले का तीव्र निषेध व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे शहीद हुए जवानों के परिवारवालों के साथ हैं, इन शब्दों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी भावना ट्वीट द्वारा व्यक्त की है।
बड़ी कीमत चुकानी होगी
महाराष्ट्र दिन पर गडचिरोली जिला के जांभूरखेड़ा गांव के पास भूमिगत सुरंग में हुए विस्फोट में १६ जवानों की मौत हो गई। नक्सलवादियों के इस कृत्य की सभी ओर निंदा हो रही है। केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने ट्वीट के माध्यम से कहा है कि नक्सलियों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी।
दिया जाएगा मुंहतोड़ जवाब
गडचिरोली में हुए नक्सली हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं, ऐसी जानकारी राज्य के पुलिस महानिदेशक सुबोध जैसवाल ने पत्रकार परिषद में दी। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए घटनास्थल के पास पुलिस कार्रवाई शुरू है, ऐसा जैसवाल ने बताया। गुप्तचर विभाग फेल है, ऐसा हम नहीं मानते। अचानक हुआ यह बड़ा हमला है। आगे ऐसी घटनी न हो, इसकी पूरी सावधानी बरती जाएगी, ऐसा पुलिस महानिदेशक ने कहा।
कायराना हमला
नक्सल प्रभावित जिला गडचिरोली में भारी पैमाने पर मतदान हुआ। जनता ने निर्भय होकर मतदान किया। भारी पैमाने पर हुए मतदान से चिढ़े नक्सलियों ने पुलिस दल पर कायराना हमला किया, जिसमें १६ जवानों की मौत हो गई। इस हमले का सरकार मुंहतोड़ जवाब देगी, ऐसा वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा।
इस्तीफा दें मुख्यमंत्री
गडचिरोली के दादापुर स्थित करीब ३६ वाहनों को जलाने के बाद नक्सलवादियों ने वहां से ६ किमी दूरी पर जांभूरखेड़ा गांव के पास जनीन के अंदर सुरंग बनाकर विस्फोट की घटना को अंजाम दिया, जिसमें १६ जवानों की मौत हो गई। महाराष्ट्र दिन के अवसर पर पुलिस दल में इस घटना से शोक की लहर पैâल गई है। इसी दरम्यान राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस्तीफे की मांग की है। गृहविभाग का उत्तरदायित्व मुख्यमंत्री के पास है। उनके मन में जरा भी लाज है तो तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें। नक्सलवादी हमले का तीव्र निषेध करते हुए पवार ने कहा कि मारे गए जवानों के संबंध में दुख व्यक्त करने के सिवाय दूसरा विकल्प नहीं है। राज्य में नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में कानून व्यवस्था को नजरअंदाज करने का उक्त परिणाम है, ऐसा पवार ने कहा।