" /> नजरबंद! शक के दायरे में पूरा शहर

नजरबंद! शक के दायरे में पूरा शहर

 घरों में रहना मजबूरी, बचाव के लिए जरूरी
 लोकल ट्रेनों में ६० प्रतिशत भीड़ कम
 शहर के कई मंदिरों में दर्शन हैं बंद
 नमाज भी घर पर ही पढ़ने की अपील
 कॉरपोरेट्स में `वर्क  फ्राॅम होम’ शुरू

कोरोना का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि जागरूक जनता सरकार और प्रशासन के निर्देशानुसार बचाव और उपाय के सारे प्रयास कर रही है। लेकिन खौफ और बचाव के मद्देनजर अधिकतर लोग घर पर ही रहना पसंद कर रहे हैं। अगर कोई बाहर निकल भी रहा है और गलती से खांस भर देने से या छींकने के कारण लोग एक-दूसरे को टेढ़ी नजर से देख रहे हैं। एक प्रकार से पूरा शहर शक के दायरे में है। जबकि अधिकतर लोग तो घर के भीतर ही रहना पसंद कर रहे हैं। एक प्रकार से `नजरबंद’ रहते हुए लोग अपना काम भी कर रहे हैं। ज्ञात हो कि कई कॉरपोरेट संस्थानों ने `वर्क प्रâॉम होम’ की भी सुविधा दे रखी है। इसके अलावा कई लोग अत्यावश्यक कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। बता दें कि मुंबई शहर और आसपास के मंदिरों को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया गया है। वहां केवल पुजारी ही प्रवेश कर सकेंगे। मनपा के आंकड़े बता रहे हैं कि ५२८ लोगों ने खुद को सेल्फ क्वारंटाइन करके रखा हुआ है। लगातार निरीक्षण में रहते हुए समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की भी जांच की जा रही है। इस बीच दक्षिण मुंबई की मीनारा मस्जिद प्रबंधन ने सर्दी-खांसी से पीड़ित लोगों को मस्जिद में नमाज के लिए नहीं आने की अपील की है और जो लोग नमाज पढ़ने आ रहे हैं, उनसे निवेदन किया गया है कि वे नमाज पढ़ने के बाद तुरंत मस्जिद से बाहर चले जाएं। जबकि कुछ मुफ्तियों ने सभी मस्जिदों के मौलवियों से नमाज जल्द खत्म करने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि फर्ज की नमाज मस्जिद में पढ़ी जाए और बाकी नमाज लोग घरों में भी पढ़ें। इसके चलते भी अधिकतर लोग घरों पर ही नमाज पढ़ रहे हैं। बता दें कि रेल विभाग के अनुसार लोकल ट्रेनों में लगभग ६० प्रतिशत भीड़ कम देखने को मिली है। बाजारों को भी एक दिन छोड़कर एक दिन चालू रखने का निर्देश दिया गया है। बचाव के लिहाज से अधिकतर लोग घरों में ही `नजरबंद’ हैं और जो लोग घरों से बाहर निकल भी रहे हैं वे सुरक्षा व बचाव में कोई कोताही नहीं बरत रहे।