नतीजों के बाद फुर्रऽऽऽ!

देश की जनता तो २३ मई का बेसब्री से इंतजार कर ही रही है कि कब नई सरकार बने पर इसके साथ ही कुछ राजनीतिक ‘चिड़ियों’ को भी इसका इंतजार है। पर इन राजीनिक ‘चिड़ियों’ के इस इंतजार का कारण दूसरा है। ये २३ को हवा का रुख देखकर अपने भविष्य का पैâसला तय करेंगी कि उन्हें अपनी पार्टी में बने रहना है या मौका देखकर फुर्रऽऽऽ हो जाना है और नई पार्टी का दामन थाम लेना है। इन राजनीतिक चिड़ियों में कांग्रेस-राकांपा आघाड़ी के कई विधायक शामिल हैं। अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलट-फेर देखने को मिलेगा।
पिछले एक अरसे से कांग्रेस-राकांपा में कई विधायकों ने बागी तेवर अपना रखे हैं। यह बात इन दोनों पार्टियों में सभी को पता है। मगर चुनावी माहौल होने के कारण इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। राधाकृष्ण विखे पाटील जैसे वरिष्ठ नेता ने तो खुलेआम भाजपा से चुनाव लड़नेवाले अपने बेटे का प्रचार किया। उन्हें पार्टी से निकाला जाएगा, ऐसी खबरें कई बार आर्इं फिर ठंडी हो गर्इं। इस चुनाव में करीब आधा दर्जन कांग्रेस-राकांपा के नेताओं ने इसी तरह अपनी पार्टी के नेताओं के विरोध में खुलकर प्रचार किया। अब इन पार्टियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस-राकांपा के सभी बागी २३ मई का इंतजार कर रहे हैं। अगर उस दिन एनडीए की सत्ता में पुन: वापसी होती है तो ये सभी कांग्रेस-राकांपा की डाल से उड़ सकते हैं और महायुति में शामिल हो सकते हैं।
गौरतलब हो कि राधाकृष्ण विखे पाटील के पुत्र डॉ. सुजय विखे पाटील ने भाजपा के टिकट पर नगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। इस चुनाव में राधाकृष्ण ने बागी तेवर अपनाते हुए भले ही भाजपा का प्रचार किया लेकिन भाजपा में शामिल नहीं हुए। लोकसभा चुनाव परिणाम का अंदाजा लेने के बाद ही वे अपने राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेंगे।
उनके एक नजदीकी सूत्र के अनुसार अगर केंद्र में भाजपा की सत्ता आई तो राधाकृष्ण भाजपा में प्रवेश करेंगे, वर्ना कांग्रेस में ही रहना पसंद करेंगे। इसी प्रकार कांग्रेस विधायक कालीदास कोलंबकर ने भी कांग्रेस प्रत्याशी एकनाथ गायकवाड़ के खिलाफ लोकसभा चुनाव में प्रचार किया लेकिन अब तक कोलंबकर ने कांग्रेस छोड़ी नहीं। विधायक नितेश राणे के पिता नारायण राणे ने कांग्रेस को भले छोड़ दिया, परंतु नितेश राणे ने कांग्रेस नहीं छोड़ी। इसी तरह विधायक जयकुमार गोरे सहित कांग्रेस के कई विधायक कांग्रेस छोड़ने की तैयारी में हैं, परंतु वे सभी नतीजों के इंतजार में बैठे हैं। राकांपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री विजय सिंह मोहिते पाटील अब भी राकांपा में बने हुए हैं, जबकि उनके पुत्र रणजीत मोहिते पाटील भाजपा में शामिल हो गए हैं। राकांपा के विधायक जयदत्त क्षीरसागर लोकसभा चुनाव में महायुति के उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। इन दोनों नेताओं पर राकांपा ने अब तक कार्रवाई नहीं की। गौरतलब है कि २३ मई को लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद जून महीने के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल का विस्तार होनेवाला है। इस मंत्रिमंडल विस्तार में राधाकृष्ण विखे पाटील और राकांपा नेता विजय सिंह मोहिते पाटील के शामिल किए जाने की चर्चा जोरों पर है। इसके अलावा १७ जून से विधानमंडल का मॉनसून सत्र शुरू होनेवाला है। महाराष्ट्र सरकार के इस कार्यकाल का यह अंतिम अधिवेशन है। इसलिए २३ मई के चुनाव परिणाम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भारी उथल-पुथल होने की संभावना जताई जा रही है।