" /> नदी है या नाला?, अभागन ओशिवरा

नदी है या नाला?, अभागन ओशिवरा

आज जब लोग मुंबई की नदियों के पास से गुजरते हैं तो उन्हें ये सोचना पड़ता है कि आखिर ये नदी है या नाला। मनपा प्रशासन ने मुंबई की मीठी नदी को स्वच्छ बनाने की परियोजना बनाई और उस पर कार्य करना शुरू कर दिया लेकिन मीठी की ही तरह मुंबई में कई अन्य नदियां ऐसी हैं, जो बुरी तरह से प्रदूषित हो चुकी हैं और बीमारियां पैâला रही हैं। इन्हीं नदियों में से एक है ओशिवरा नदी। ये नदी आरे मिल्क कॉलोनी से शुरू होती है और गोरेगांव हिल्स से गुजरते हुए मालाड क्रिक में बहती है। मीठी नदी की तरह ही ये नदी भी बुरी तरह प्रदूषित हो गई है और आज लोगों द्वारा अभागन ओशिवरा नदी कम और नाले के रूप में ज्यादा देखी जा रही है।
आज नाले के रूप में पहचानी जानेवाली इस ओशिवरा नदी का पानी कभी लोग पीते थे। उसमें नहाते और मछली पकड़ते थे। नदी के किनारे फिल्मों की शूटिंग हुआ करती थी लेकिन समय के साथ आबादी बढ़ने और औद्योगीकरण के कारण ये नदियां प्रदूषित होती गर्इं और लोगों ने इसमें कचरा पैâलाना जारी रखा। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार नदी में होनेवाले प्रदूषण का ८० प्रतिशत कारण स्थानीय लोगों द्वारा फेंका जानेवाला कचरा है, इसके अलावा बाकी है औद्योगिक उत्सर्जन। नदी के आसपास का वातावरण भी खतरे से जूझ रहा है और यहां पर मौजूद मैंग्रोव्ज को तहस-नहस किया जा रहा है। ऐसे में इन नदियों के आसपास का वातावरण बीमारियों से भरा हुआ है। रसायनिक उत्सर्जन होने, नदियों को मलबे और कचरे से भर दिए जाने के कारण इसमें पानी की जगह मल-मूत्र प्रवाहित हो रहा है। जब लोग इस ओशिवरा नदी के पास से गुजरते हैं तो वे अपना मुंह रूमाल से ढंक लेते हैं। ऐसे में समय रहते इन नदियों को बचाने के उपाय नहीं किए गए तो मुंबई को इन नदियों में जो गंदा और प्रदूषित जल दिखाई दे रहा है वो भी सूख जाएगा। लोगों का कहना है कि मनपा द्वारा जल्द-से-जल्द ओशिवरा नदी को स्वच्छ करने का कार्य करना चाहिए। इसी के साथ शहर में और नदियों में गंदगी पैâलानेवालों पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

मैं मुंबई शहर में नया आया हूं। मुझे ये जानकर हैरानी हुई कि ये नदी है। प्रदूषण की चपेट में आने से ये नदी नाले जैसी दिखाई देती है। इस नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों और मनपा को मिलकर काम करना चाहिए।
– हरीश गोयल (निवासी)
मैं जब भी ओशिवरा नदी के पास से गुजरता हूं तो अपना चेहरा रूमाल से ढंक लेता हूं। ये स्थान बेहद ही बदबूदार है और न जाने कितनी ही बीमारियों को जन्म दे रहा है। इस गंदे पानी में असंख्य मच्छर और मक्खी पनपते हैं, जो लोगों के घरों में पहुंचकर उन्हें अपना शिकार बनाते हैं। – अमित दाधीच (निवासी)
मनपा ये सुनिश्चित करने में लगी है कि सबसे पहले झोपड़पट्टियों, आसपास के इलाकों और कारखानों से निकलनेवाले कचरे को नदियों में मिलने से रोका जाए। इसके बाद मनपा द्वारा इनकी सफाई करवाई जाएगी। मुंबई की चारों नदियों की सफाई के लिए परियोजना बनाई गई है और उन पर काम जारी है। – मनपा अधिकारी