नमोस्कार!, 5 साल में एनडीए से 16 आउट

क्या राजग (एनडीए) की जमीन दरक रही है? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है जो इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण है कि भाजपा के अहंकार व तानाशाही रवैये के कारण एक के बाद एक साथी दल राजग को ‘नमोस्कार’ कर बाहर जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में होनेवाली चर्चाओं के अनुसार भाजपा को आज कल दो ही व्यक्ति नरेंद्र मोदी और अमित शाह चला रहे हैं। इन दोनों के अहंकार से न केवल राजग के सहयोगी दल बल्कि भाजपा के भीतर भी कई नेता परेशान हैं। इसलिए जैसे-जैसे २०१९ के लोकसभा चुनाव का वक्त करीब आ रहा है, भाजपा की परेशानी और ‘नमो’ (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के माथे की शिकन बढ़ती जा रही है। पिछले साढ़े चार साल में अब तक करीब १६ राजनीतिक दल भाजपा के काम-काज से नाराज होकर एनडीए से आउट हो चुके हैं। मित्र दलों के साथ छोड़ने से २०१९ में भाजपा की चुनावी नैया वैâसे पार होगी? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का अब पसीना छूटने लगा है।

वर्ष २०१४ में लोकसभा का चुनाव लड़ते समय भाजपा के साथ राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में २८ घटक दल थे। उस समय राजग के साथ मिलकर चुनाव लड़नेवाली भाजपा को २८२ सीटों पर सफलता मिली थी, जबकि भाजपा के मित्र दलों के ५४ सांसद विजयी हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तब एक मजबूत बहुमतवाली सरकार का गठन हुआ था। पर आज राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका है और भाजपा से नाराज १६ मित्र दलों ने भाजपा का दामन छोड़ दिया है और कई छोड़ने का मन बना रहे हैं।

मित्र दलों का साथ छूटने से भाजपा के लिए आगामी लोकसभा का चुनाव काफी महंगा साबित होनेवाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कार्यप्रणाली से नाराज होकर १६ दलों ने राजग को नमस्कार कर दिया है। पिछले चुनाव के समय राजग का गठन करते समय भाजपा ने अपने मित्र दलों को जो आश्वासन दिया था, उन्हें भाजपा ने नहीं निभाया। इतना ही नहीं कई निर्णय लेते समय घटक दलों से किसी तरह का कोई विचार-विमर्श भी नहीं किया गया। भाजपा के एक तरफा निर्णय से नाराज होकर ये दल भाजपा को गुड बाय कहते जा रहे हैं।
हाल ही में नागरिकता के विधेयक के मुद्दे पर असम गण परिषद ने राजग से खुद को अलग कर लिया। कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल की गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने राजग को नमस्कार कर दिया। चंद्राबाबू नायडू की तेलगु देशम पार्टी ने आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर राजग से रिश्ता खत्म कर लिया था। बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने भी हाल ही में भाजपा के साथ सीटों का तालमेल नहीं बैठने के कारण राजग से खुद को अलग कर लिया है। कर्नाटक की कर्नाटक प्रज्ञानवंथा पार्टी, मिजोरम की एमडीएफ, केरल की आरएसपी, केरल की ही केरल जनपक्षम, केरल की ही केरल कांग्रेस, तमिलनाडु में एमडीएमके, डीएमडीके तथा एस. रामदॉस की पार्टी पीएमके सहित जम्मू-कश्मीर के पीडीपी ने भी भाजपा के साथ होनेवाले अपने गठबंधन से अपना रिश्ता तोड़ लिया है। नागालैंड की नागा पीपल्स पार्टी जो १६ साल से राजग का हिस्सा थी उसने भी २०१८ में राजग से रिश्ता खत्म कर डाला है। हरियाणा में जनहित कांग्रेस ने तो महाराष्ट्र में राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने भी किसानों के मुद्दे पर राजग से खुद को अलग कर लिया है। इस तरह २०१४ में जो राजग का हिस्सा बनकर भाजपा के साथ लोकसभा का चुनाव लड़े थे उनमें से १६ राजनीतिक दलों ने २०१९ के लोकसभा चुनाव से पहले ही राजग को ‘नमोस्कार’ कर दिया है। कुछ राजनीतिक दल ऐसे भी हैं जिन्होंने २०१४ में राजग की सरकार बनने के बाद राजग में शामिल हुए थे। उनमें से भी दो दलों ने राजग के कामकाज से नाराज होकर राजग से ‘तलाक’ ले लिया है। इनमें से एक है केरल के आदिवासी नेता सीके जानु की पार्टी जनाधिपत्य राष्ट्रीय सभा जिसने २०१८ में रिश्ता तोड़ लिया। इसके साथ ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्थान आवाम मोर्चा ने राजग को बाय-बाय कर दिया है। इस तरह राजग बनने के बाद से कुल १८ मित्र दल भाजपा से मोहभंग होने के कारण अब तक राजग को राम-राम कर चुके हैं।