" /> नवरात्रि का पहला दिन…शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्रि

नवरात्रि का पहला दिन…शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्रि

तीन साल में एक बार लगनेवाला अधिक मास कल समाप्त हो गया। शक्ति की उपासना का पावन पर्व नवरात्रि आज से शुरू हो रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के ९ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ ही व्रत भी रखे जाते हैं। इस बार नवरात्रि का त्योहार आज (१७ अक्टूबर) से आरंभ होकर २५ अक्टूबर तक मनाया जाएगा। आमतौर पर नवरात्रि पितृ पक्ष के तुरंत बाद शुरू हो जाती हैं लेकिन इस बार अधिक मास के कारण पूरे एक महीने विलंब से नवरात्रि शुरू हो रही हैं। वैसे यहां ये बताना जरूरी है कि साल में ४ नवरात्रि मनाई जाती हैं। दो गुप्त और दो सामान्यजन के लिए। एक चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि।
वैसे तो मां दुर्गा की पूजा के लिए किसी खास समय की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन नवरात्रि का समय मां की पूजा के लिए विशेष माना गया है। नवरात्रि मनाने के पीछे का प्राकृतिक कारण तो यह माना जाता है कि इस समय मौसम परिवर्तित होता है इसलिए जब हम नौ दिनों तक व्रत करते हैं तो शरीर को ऋतु के अनुसार ढलने का समय मिल जाता है, जो हमारे स्वास्थ के लिए अच्छा माना जाता है।

आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा
१७ अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है। नवरात्रि यानी देवी दुर्गा को समर्पित नौ रातें, जिनमें पहली रात यानी पहला दिन होता है माता शैलपुत्री का। पहले दिन मां के इसी स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक इन देवी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था और इसी के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा।
माता पार्वती का स्वरूप हैं मां शैलपुत्री
नवरात्रि में ९ दिनों तक माता पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती इन्हीं देवियों के ९ स्वरूपोंं की पूजा का विधान है। शुरुआत के तीन दिन पार्वती के स्वरूपों की ही पूजा की जाती है, जिनमें सबसे पहले दिन होती है माता शैलपुत्री की पूजा।
शैलपुत्री माता की कथा-
कहते हैं एक बार राजा दक्ष ने बहुत बड़ा यज्ञ किया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव और उनके परिवार को  को आमंत्रित नहीं किया। जब यह बात राजा दक्ष की बेटी व भगवान शिव की पत्नी सती ने सुनी तो उनका मन उस यज्ञ में जाने का हुआ। शिव शंकर ने उन्हें काफी समझाया और जाने से मना किया लेकिन फिर भी वो उस यज्ञ में पहुच गर्इं, जब सती उस यज्ञ में पहुंची तो उनका सभी ने अनादर किया यहां तक कि राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान भी किया। यह सब सती सह न सकी और जलते कुंड में कूद गर्इं। जब भगवान शिव को इसकी जानकारी मिली तो भयंकर संहार हुआ। कहा जाता है कि सती अपने अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं इसीलिए वो ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी गर्इं। साथ ही उन्हें हैमवती के नाम से भी जाना जाता है।
ऐसा है देवी शैलपुत्री का स्वरूप
शैलपुत्री माता का स्वरूप बेहद ही सौम्य है, जो सदैव बैल पर विराजमान होती हैं। यही कारण है कि इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। पिछले जन्म की तरह ही इन देवी का विवाह भी शंकर जी के साथ ही हुआ था।
मां को लगाएं पसंदीदा भोग
मां शैलपुत्री को सफेद चीज पसंद है। इस दिन सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है और अगर यह गाय के घी में बनी हों तो व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और हर तरह की बीमारी दूर होती है।
मंत्र : ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।।
प्रार्थना
वंदे वाञ्छितलाभाय चंद्रार्धशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
स्तुति
या देवी सर्वभू‍तेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

नवरात्रि में करें राशि के अनुसार मंत्र जाप
मेष- मेष राशि के जात‍क नवरात्रि में शक्ति के साथ शिव आराधना करें। निम्न मंत्र की ११ माला रोज करें। ‘ॐ नम: शिवाय, ॐ शिवाय नम: या ॐ दुं दुर्गाय नम:’
वृषभ- वृषभ राशि के जातक देवी की निम्न मंत्र से आराधना करें। ‘ॐ मातंगी नम:’
मिथुन- मिथुन राशि के जातक नवरात्रि में निम्न मंत्र का जप करें। ‘ॐ शिव शत्तäयै नम:’
कर्क- कर्क राशिवाले लोग देवी की निम्न मंत्र से आराधना करें। ‘ॐ आनंदांनायकायै नम:’
सिंह- सिंह राशि के जा‍तक निम्न मंत्र जपें। ‘ॐ दीप लक्ष्म्यै नम:’
कन्या- कन्या राशि के जातक देवी की निम्न मंत्र से आराधना करें। ‘ॐ सर्वमंत्रमयी नम:’
तुला- तुला राशि के जातक देवी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जप करें। ‘ॐ अंबे नम:’
वृश्चिक- वृश्चिक राशिवाले लोग नवरात्रि के नौ दिनों में निम्न मंत्र जपें। ‘ॐ ब्रह्मांड नायिकायै नम:’
धनु- धनु राशि के जातक निम्न मंत्र जाप करें। ‘ॐ विद्या लक्ष्म्यै नम:’
मकर- मकर राशि के जातक देवी की निम्न मंत्र से आराधना करें। ‘ॐ आद्य नायकायै नम:’
कुंभ- कुंभ राशि के लोग नवरात्रि में निम्न मंत्र जाप कर लाभ उठाएं। ‘ॐ शांभवी नम:’
मीन- मीन राशि के लोग नौ दिन निम्न मंत्र का जप करके अपना कल्याण करें। ‘ॐ कात्यायनी नम:’

नवरात्रि का पौराणिक महत्व
नवरात्रि मनाने के विषय में दो कथाएं मिलती हैं। एक कथा रामनवमी से संबंधित है तो दूसरी कथा महिषासुर के वध से संबंधित है। प्रथम कथा के अनुसार महिषासुर नाम का राक्षस था, जो ब्रह्मा जी का उपासक था। अपने तप के बल पर उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई मनुष्य, देवता या दानव उसका अंत न कर सके। अपने इस वरदान के कारण वह निर्दयता से तीनों लोकों में आतंक मचाने लगा। देवता और ऋषि-मुनि सभी उसके कृत्यों से अत्यंत परेशान हो गए, तब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और देवों के देव महादेव ने अपनी शक्तियों को एक साथ करके मां दुर्गा को उत्पन्न किया। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच पूरे नौ दिनों तक युद्ध चला, जिसके पश्चात् मां दुर्गा ने उस राक्षस का अंत कर दिया और सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई।
दूसरी कथा के अनुसार राम जी लंका पर आक्रमण करने से पहले रावण से युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, तब उन्होंने रामेश्वरम में नौ दिनों तक मां की पूजा- आराधना की। जिसके बाद राम जी ने लंका पर विजय प्राप्त की इसलिए नवरात्रि के बाद दशहरा (विजयदशमी) का त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत के रूप में मनाया जाता है।