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नवायसलौह दवा से बढ़ेगा खून

मैं शुद्ध शाकाहारी ७९ वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हूं। मुझे पेशाब में जलन होती है। शुरुआत में इस पर मैंने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब जलन ज्यादा बढ़ गई तो मैंने दवाई ली परंतु उसके बाद भी राहत नहीं मिल रही है। सुबह से दोपहर तक जलन कम होती है और दोपहर के बाद बढ़ जाती है व रात को सोने के समय तक बनी रहती है। इसी जलन के चलते दोपहर में मैंने दही के साथ रोटी व चावल खाना प्रारंभ कर दिया है। नित्यक्रिया के बाद सुबह ७ बजे वॉकिंग के लिए निकलता हूं। मेरी पाचन शक्ति सामान्य है। प्यास न लगने के बावजूद आवश्यकता से अधिक पानी पीता हूं, ये मेरे लिए हानिकारक तो नहीं है न?
-सभाजीत मौर्य, तीसगांव, कल्याण
प्यास लगने पर ही पानी पीना चाहिए। पानी धीरे-धीरे व सादा पानी ही पीना चाहिए। ठंडा पानी पीने से बचें। ठंडा पानी पाचन शक्ति को कमजोर करता है व अजीर्ण पैदा करता है। औसतन प्रत्येक व्यक्ति को १,२०० से १,५०० मिली लीटर पानी पीना चाहिए। लेकिन मौसम, रोग व अन्य कारणों से पानी की मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। आजकल लोग बेवजह ज्यादा पानी पीते हैं, जो कि नुकसानदेह है। ज्यादा पानी पीने से किडनी को बेवजह ज्यादा काम करना पड़ता है। आप गोक्षुरादि गुगुल व चंद्रप्रभावटी की दो-दो गोली दिन में ३ बार लें। रात को सोते समय पानी पीकर न सोएं। अन्यथा मूत्र त्याग के लिए बार-बार उठना पड़ेगा। आंवले का मुरब्बा एक-एक चम्मच दो बार लें। इससे जलन कम होगी और ये शरीर के लिए उत्तम टॉनिक का काम करेगा। खाने में मिर्च-मसाला कम करें। खाने में दूध व छाछ की मात्रा बढ़ाएं। भोजन के बाद अविपत्तिकार चूर्ण एक-एक चम्मच दो बार खाएं। ।
मैं २३ वर्षीया नवयुवती हूं। मेरा हिमोग्लोबिन ८ और ९ ग्राम के बीच रहता है।

मासिक के दौरान मुझे बेहद कमजोरी रहती है और थोड़ा सा भी काम करने के बाद बेहद थकान आ जाती है। आयरन व कैल्शियम की दवाएं भी मैंने खाई लेकिन अब आयुर्वेदिक दवाई करना चाहती हूं? -रागिनी, बदलापुर
आपके पत्र से लगता है कि आप एनीमिया रोग से ग्रस्त हैं। शरीर में सामान्य रूप से हिमोग्लोबिन की मात्रा १२ से १६ ग्राम के बीच होनी चाहिए। साथ-ही-साथ लाल रक्तकण आरबीसी चार लाख के ऊपर होनी चाहिए। इस तरह की तकलीफ को आयुर्वेद में पांडु नाम से जाना जाता है। नवायसलौह व पुर्ननवामंडूर की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार पानी के साथ लें। कुमारी आसव व लोहासन ३-३ चम्मच मिलाकर समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद दो बार लें। भोजन में दूध, दही, घी, मक्खन की मात्रा बढ़ाएं। पांडु के रोगियों को स्नेह देना आवश्यक व महत्वपूर्ण है। पौष्टिक व संतुलित आहार ले। हरी सब्जियां, फल जैसे अनार, अंगूर, खजूर, ड्रायप्रâूट, मोसंबी, संतरा, पाइनेपल, गाजर, बीट ज्यादा से ज्यादा खाएं। कई बार पेट में कृमि होने के कारण भी शरीर में खून कम होता है। अत: कृमि नाशक दवा भी लेनी चाहिए। आप उपरोक्त दवाएं व आहार तीन महीने तक लें। उसके बाद पुन: रक्त परीक्षण कराएं। यदि फर्क न पड़े तो अपने चिकित्सक को मिलकर लाल रक्तकण की विशेष जांच कराएं।

मेरी उम्र ३५ वर्ष है और मैं पूरे दिन में स्कूटर पर १०० किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करता हूं। मेरी आंखों की पलकों के नीचे सफेद-सा चिकना पदार्थ जमा होता है। आंखों में खुजली होती है। मेरी दृष्टि ठीक है और आंखों का नंबर भी नहीं है?
-अभय, नेरुल
आयुर्वेद में इसे नेत्र का मल कहा जाता है जो कि एक सामान्य प्रक्रिया है। दिन में दो बार साफ पानी अथवा त्रिफला क्वाथ का काढ़ा बनाकर उससे आंखों को धोएं। मेडिकल स्टोर्स पर ‘आय कप’ मिलता है उसकी मदद से आंखों को धोना बेहद आसान होता है। ड्राइविंग या यात्रा करते समय हेल्मेट या गॉगल पहनकर अपनी आंखों की रक्षा करें। आंखों को धूप, धूल, कचरा, सीधी हवा, आग व धुएं से बचाएं। पॉल्यूशन का भी असर आंखों पर पड़ता है। सूक्ष्मत्रिफला व सप्तामृत लौह की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार गरम पानी से लें। इन दवाओं से इन्फेक्शन कंट्रोल होता है व आंखों की रक्षा होती है। नेत्रों में ड्रॉप डालना बहुत जरूरी है। नेत्र बिंदू ड्रॉप, दृष्टि ड्रॉप, एमडी ड्रॉप इनमें से कोई भी एक ड्रॉप दो-दो बूंद सुबह-शाम आंखों में डालें। संतुलित व पौष्टिक आहार लें। सहिजन की फलियां आंखों के लिए बेहद उपयोगी हैं।
मैं ३४ वर्षीय युवक हूं। मुझे २००२ से एचआईवी का संक्रमण है। २०१० में मैं बिल्कुल स्वस्थ था। २०१० से मेरी एआरटी की चिकित्सा सरकारी दवाखाने से चल रही है।

अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं। मेरा सीडी-४ काउंट ९२६ है। मेरा संपर्क एक ३६ वर्षीय विधवा से हुआ जो एचआईवी पॉजिटिव है। हम दोनों विवाह करना चाहते हैं। हम विवाह करें या न करें? -अनाम, खारेगांव, कलवा
एचआईवी का संक्रमण हैं और आप स्वस्थ हैं। एआरटी दवाई चल रही है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप सामान्य व्यक्ति की तरह अपना जीवनयापन कर सकते हैं। यदि आप दोनों स्वस्थ हैं तो किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं है। अगर आप एक-दूसरे को दिल से चाहते हैं तो आप विवाह करें। यदि आप दोनों स्वस्थ हैं तो संतान भी होगी। पॉजिटिव लोगों को गर्भावस्था के सातवें, आठवें और नौवें महीने में दवा दी जाती है, जिससे नवजात शिशु में एचआईवी संक्रमण की संभावना नहीं रहती है।