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नव उद्यमी ध्यान दें!

कोरोना आपदा के लॉकडाउन के बाद हुए अनलॉक में युवा उद्यमी सबसे ज्यादे उत्सुक हैं अपना कोई व्यवसाय शुरू करने के लिये। और यह उत्साह हुआ है इस लॉकडाउन में घोषित हुए राहत पैकेज में एमएसएमई पर सरकार के फोकस के कारण। लेकिन हमें यह समझना होगा की लॉकडाउन में घोषित पैकेज सिर्फ उन्ही एमएसएमई  को मिला है जो पहले से विद्यमान हैं और उन्होंने कोई ऋण लिया हुआ है, और यदि ऐसा नहीं है तो वह राहत उनके लिए नहीं है। उन्हें सामान्य पूर्व निर्धारित तरीके से ही अपने बिजनेस को शुरू करना पड़ेगा। अतः यदि आप कोई नया उद्यम शुरू करना चाहते हैं तो लॉकडाउन में घोषित हुए राहत पैकेज के मुगालते में ना पड़ें। उसके लिए आप पात्र नहीं हैं। दूसरा सबको यह भ्रम आ गया है कि हर व्यवसाय जिसका टर्नओवर २५० करोड़ से कम है वह एमएसएमई है। अतः उसे इसके सभी राहत मिलेंगे। अतः जान लीजिये की एमएसएमई में ट्रेडिंग, फुटकर व्यापार, थोक व्यवसाय नहीं आता है। इसमें सिर्फ वही उद्यम आते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर में हैं और जो अपने काम में प्लांट मशीनरी या इक्विपमेंट का प्रयोग करते हैं। अतः मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के अलावा ऐसे सर्विस सेक्टर वाले व्यवसाय जो की इक्विपमेंट के प्रयोग से अपना व्यवसाय चलाते हैं जैसे की इसमें ट्रासंपोर्ट बिजनेस एवं रिपेयर जोकि मशीन के प्रयोग से होता है, वह आ जायेगा लेकिन कोई भी ट्रेडिंग व्यवसाय नहीं आएगा। भले ही उसका टर्नओवर २५० करोड़ से कम है।
अब यदि आपका बिजनेस एमएसएमई कैटेगरी में आता है तो सबसे पहले आपको ऑनलाइन जाकर अपना उद्योग आधार प्राप्त करना चाहिए और ऑनलाइन एमएसएमई का पंजीयन कराना चाहिए। साथ ही आपको जानना चाहिए कि इस पंजीयन से  आपको लाभ क्या क्या हैं? कई लोगों को भ्रम है कि एमएसएमई में पंजीयन हो जाने भर से आपको स्वतः ही वित्तीय सहायता मिल जाएगी या ऋण माफ़ हो जायेगा या सरकार पूंजी देगी आदि लेकिनऐसा बिलकुल भी नहीं है। एमएसएमई में पंजीयन हो जाने से आप इकॉनमी में प्राथमिकता वाले व्यापारी हो जायेंगे और आपको सिर्फ इसलिए दबाया नहीं जायेगा कि आप छोटे हैं। चाहे आपको ऋण चाहिए या आपका कहीं पैसा बाकी है या आप सरकारी टेंडर डालने जा रहें हैं। रही बात बैंक लोन की तो इसे आपको खुद बैंक में जाकर लेना पड़ेगा।सरकार ने जनहितकारी नीतिययां तो बनार्इं लेकिन क्रियान्वयन इन्ही बैंक के हाथ में है।
सरकार से आपको आपकी मार्केटिंग में सहायता मिलेगी। सरकार ने एमएसएमई को बढ़ावा देने और सरकारी कंपनियों द्वारा एमएसएमई से  २५ फीसदी  सामान अनिवार्य रूप से खरीदना सुनिश्चित किया हुआ है और इसे सरल बनाने हेतु सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पोर्टल भी शुरू किया है। इस सरकारी पोर्टल पर आप यदि रजिस्ट्रेशन करा लें तो आप घर बैठे किसी भी सरकारी खरीद में भाग ले सकते हैं। इसलिए सबसे पहले पंजीकरण कराएं। सरकार के इस पोर्टल से एमएसएमई से जुड़े व्यापारियों को अब बड़ा फायदा हो रहा है। जीईएम पर दिए जाने वाले कुल ऑर्डर्स में एमएसएमई की हिस्सेदारी ४५ फीसदी के करीब है। अब इसके माध्यम से छोटे शहर में रहने वाले कारोबारी भी सरकार के साथ बिजनेस कर सकते हैं। जेम ने इस सारी प्रक्रिया को आसान कर दिया है कि कोई भी उद्यमी आसानी से इस पोर्टल पर रजिस्टर करके सरकार से डील कर सकता है और अपना प्रोडक्ट बेच सकता है। इस प्लेटफॉर्म पर कोई भी विक्रेता आसानी से रजिस्ट्रेशन करा सकता है। एक खुला मंच होने के कारण सरकार के साथ बिजनेस करने वालों के सामने यहां कोई बाधा नहीं है। जेम में एमएसएमई ऑफिस स्टेशनरी से लेकर वाहन तक बेच सकता है। फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी कम्पनियां भी अब एमएसएमई को अपने पोर्टल से रणनीति के तहत जोड़ रहीं हैं। इस प्रकार यह हुआ की आपको आपके बिक्री के लिये एक इकोसिस्टम मिल जायेगा।
अब दूसरी समस्या आती है की नव उद्यमी को पूंजी कहहां से मिलगी और इसमें उसे क्या-क्या सरकारी मदद मिल सकती है? आज भी कई बैंक बिना सिक्युरिटी (प्रतिभूति) ऋण नहीं देते हैं। इसके लिए इन नव-उद्यमियों को जानना चाहिए कि सरकार की कई योजनाएं हैं, जिसमें सरकार ही प्रतिभूति के रूप में गारंटी देती है और किसी अतिरिक्त प्रतिभूति की आवश्यकता नहीं रहती है। सिवाय कुछ न्यूनतम सालाना शुल्क भरने के। इसमें प्रमुख है क्रेडिट गारंटी फंड योजना जिसे सीजीटीएसएमई भी कहते हैं और दूसरा है राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम जिसे एनएसआईसी भी कहते हैं उसकी योजना। इनके पास कई ऐसी योजनायएं हैं जो बैंक के किसी भी ऋण के लिए गारंटी का काम करती हैं और व्यापारी को अपने घर या संपत्ति को गिरवी रखने की जरुरत नहीं पड़ती है। इसीलिए सभी नव उद्यमियों को इन दोनों संस्थाओं की जानकारी इनकी वेबसाइट में जाकर विस्तृत रूप से लेनी चाहिए। इससे बड़ी सहायता मिलेगी। क्रेडिट गारंटी फंड योजना सीजीटीएसएमई योजना के तहत कवर की जाने वाली क्रेडिट सुविधाएं में कोई भी एमएसएमई उद्यम या व्यापार चाहे वो प्रॉपराइटर फर्म हो या कम्पनी हो, २ करोड़ तक टर्म लोन एवं वर्किंग कैपिटल (फंड आधारित और नान फंड आधारित) लोन ले सकती है और वो भी बिना किसी प्रतिभूति या तीसरे पक्ष की गारंटी के। देश में कई औद्योगिक क्षेत्रों में इस योजना के लाभार्थी बहुत हैं क्योंकि उनके पास जानकारी है जबकि बाकी हिस्सों में अभी जागरूकता आना बाकी है। इस योजना के तहत फुटकर व्यापार वाले भी ऋण ले सकते हैं। जरुरी नहीं कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ही हो। इस फंड ने हाइब्रिड प्रतिभूति गारंटी भी देने की योजना शुरू की है। इस गारंटी के तहत कवर की गई उन इकाइयों के लिए, जो प्रबंधन के नियंत्रण से परे कारकों के कारण बीमार हो रही हैं, उनके लिए भी दिए गए पुनर्वास सहायता ऋण को भी इस गारंटी योजना के तहत कवर किया जा सकता है।
दूसरी योजना है राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की योजना,  इसके सहयोग से  लघु उद्यमों को अपनी व्यक्तिगत क्षमता से भी यदि बड़े आर्डर पाने में सहायता मिलती है। इसके लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम कन्सोर्शिया दृष्टिकोण अपनाकर उन्हीं उत्पादों का विनिर्माण करने वाली इकाइयों का समूह बनाता है, जिससे लघु उद्यमों की समस्याएं आसान हो जाती हैं। एनएसआईसी साथ ही बाजार की संभावना का पता लगाकर भारी मात्राओं में आर्डर्स प्राप्त करता है और पुनः इन आर्डर्स को लघु इकाईयों में उनकी उत्पादन क्षमता के अनुसार बांट देता है। मानक विशिष्टताओं के अनुरूप उनके उत्पादों में सुधार करने एवं उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इकाइयों को जांच सुविधाएं भी प्रदान करता है। यह सरकारी खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत एकल बिन्दु पंजीकरण योजना चलाता है जिसमें पंजीकृत लघु उद्योग इकाइयां, सरकारी खरीद कार्यक्रम में खरीद संबंधी प्राथमिकता प्राप्त करती है तथा अग्रिम धनराशि, निःशुल्क टेंडर सैट, ईएमडी जमाराशि के भुगतान से छूट, टेंडर में जो सबसे कम मूल्य का प्राइस प्राप्त हुआ है और प्राप्त करने वाला गैर एमएसएमई हुआ तो भी खरीदी एमएसएमई से अनिवार्य की जाएगी आए हुए न्यूनतम मूल्य पर। एनएसआईसी, प्रत्येक वर्ष चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रदशर्नियों तथा व्यापार मेलों में भाग लेता है। यह इस मेले या प्रदर्शनी में भाग लेने हेतु इनके किरायों आदि में रियायत दिलवाकर लघु उद्यमों के प्रतिभागियों की सहायता करता है। एनएसआईसी विदेशों में प्रदर्शनी लगाने में लगने वाले खर्चे का भुगतान  भी करता है। प्रदर्शनी और मेले के अलावा यह क्रेता-विक्रेता बैठकें भी आयोजित करता है। यह वित्तीय सहयोग भी प्रदान करता है जैसे कि कच्चे माल की खरीद चाहे देशी या आयातित के लिए अल्पकालीन फाइनेंस करना। यह सस्ती दरों पर कच्चे मालों की थोक खरीद, दुर्लभ कच्चे मालों के आयात में सहायता, तथा आयात के मामले में सभी प्रक्रियाओं, कागजी कार्रवाई तथा साख पत्र जारी करने आदि का भी का काम करता है। लघु उद्यमों को आसानी से ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनएसआईसी, देश भर में लघु उद्यमों को दीर्घकालीन/कार्यशील पूंजी फाइनेंस कराने में सहायता देने हेतु कमर्शियल बैंकों के साथ स्ट्रेटेजिक गठबंधन करता है और ऋण को सुनिश्चित करता है। बेरोजगार युवाओं का इंक्यूबेशन कार्यक्रम के तहत समूचे देश में बेरोजगार व्यक्तियों के लिए स्व-रोजगार के अवसर सृजित करके नए उद्यम लगाने के लिए सहायता देते हैं। इस स्कीम का उद्देश्य उद्यमिता कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण, लघु प्रोजेक्टों के चयन, प्रोजेक्ट प्रोफाइल/रिर्पोट तैयार करने, संयंत्रों, मशीनों तथा उपकरणों का पता लगाने व उनके संसाधनों की जानकारी देने, क्रेडिट सुविधा स्वीकृत कराने में मदद करने के क्षेत्र में एकीकृत सेवाएं प्रदान करने के माध्यम से नए लघु उद्यमों को स्‍थापित करने में सहायता करना है तथा उन्हें उत्पादन तथा सेवाओं के क्षेत्र में लघु उद्यमों के विकास में तेजी लाने के लिए दूसरी सहायता सेवाएं मुहैय्या कराना है। अतः आप यदि नवउद्यम शुरू करना चाहते हैं तो इन योजनाओं की जानकारी अवश्य रखें।