नशा छोड़ा, अल्लाह भूला!

ड्रग तस्करी के मुख्य केंद्र के रूप में मुस्लिम बहुल मुंब्रा तेजी से उभर रहा है। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे नशेड़ी बनते जा रहे हैं। इस नशे के चक्कर में वे अपने दीन (अल्लाह) को भूलते जा रहे हैं। इन नशेड़ी युवकों को नशे की लत छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजा जाता है। नशा छूटने के बाद वे अपने दीन को भूल जाते हैं और फिर नशे की तरफ मुड़कर आपराधिक कृत्यों को अंजाम देते हैं।
मौलाना इकबाल काजी के अनुसार इन नशेड़ी मुस्लिम बच्चों के नशे की लत छुड़ाने के लिए मुंब्रा बायपास से सटे ‘अल तायवीन’ नामक एक नशा मुक्ति केंद्र खोला गया है, जिसमें दवा की बजाय पाक कुरान की रोशनी में नशेड़ी युवकों का इलाज किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि एमडी पावडर, चरस, गांजा, अफीम आदि नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले के तार कहीं न कहीं मुंब्रा से जुड़ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज में पढ़नेवाले मासूम बच्चे ड्रग तस्करों के आसान शिकार हो रहे हैं। इन्हें नशे का आदी बनाकर, इनके ही माध्यम से वे अन्य बच्चों को भी तेजी से अपना शिकार बना रहे हैं। जमाते इस्लामी हिंद तथा फीनिक्स स्पोर्ट एकेडमी द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा चौक चौराहों पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जमाते हिंद के परवेज के अनुसार ‘नशे से दूर रखने के लिए युवकों को विभिन्न खेलों से जोड़ा जा रहा है और पालकों से अपने बच्चों के क्रिया -कलापों पर विशेष ध्यान देने की नसीहतें दी जा रही हैं।’
मुस्लिम बच्चों में नशे की लत बढ़ रही है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि ये बच्चे नशे के चक्कर में दीन (अल्लाह) को भूलते जा रहे हैं। इस बात का खुलासा स्वयं मौलवी इकबाल काजी ने किया।
मौलवी काजी के अनुसार कुछ संस्थाओं ने अभियान चलाकर सैकड़ों नशेड़ी युवकों को नशा मुक्ति केंद्र में भेजा था पर इससे कुछ फायदा नहीं हुआ। केंद्र से वापस आने के बाद वे न केवल अपने दीन को भूल गए बल्कि वापस वे नशे की राह पर चल पड़े। इस तरह की शिकायतें लगातार आने के बाद कौसा स्थित दारुत्तक्वा नामक मदरसे में ‘अल तायबीन नशा मुक्ति केंद्र’ की स्थापना की गई है। इस नशा मुक्ति केंद्र में नशेड़ियों को दवा की बजाय कुरान की रोशनी में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। इस संबंध में मौलवी इकबाल काजी ने बताया कि हर वह युवक जो नशे की तरफ आकर्षित होता है वह दीन धर्म से दूर होता है। दीन धर्म एवं अल्लाह को मनानेवाले कभी नशे की तरफ आकर्षित नहीं हो सकते हैं। नशे के आदी हो चुके युवकों को जिन नशा मुक्ति केंद्रों में भेजा जाता है, वहां उन्हें दीन की तालीम नहीं दी जाती है। इसीलिए नशा छोड़ने के बाद भी वे युवक पुन: नशे का शिकार बन जाते हैं। दीनी तालीम देकर कुरान की रोशनी में अब तक दर्जनों नशेड़ियों को नशे से मुक्ति दिलाई जा चुकी है। कलवा मुंब्रा राकांपा अध्यक्ष एवं इत्तेहाद वेलफेयर ट्रस्ट नामक संस्था के संस्थापक शमीम खान ने बताया कि नशा बेचनेवालों तथा नशा लेनेवाले दोनों के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में धर्मगुरु हजरत मोईन मियां से एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही मिलनेवाला है। वैंâप लगाकर नशेड़ियों को नशा मुक्ति केंद्र भेजना तथा नशे के खिलाफ ड्रग्स प्रâी मुंब्रा अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का काम जल्द शुरू किया जानेवाला है। उत्तर भारतीय महासभा के अध्यक्ष करीम खान ने बताया कि मुंब्रा तथा कौसा में चोरी, छिनैती, वाहनों की चोरी, मारपीट आदि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। चाकू, चॉपर तथा ब्लेड से हमले की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। नशे के लिए या फिर नशे में यह घटनाएं हो रही हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए धार्मिक संस्थाओं के साथ-साथ सामाजिक संस्थाएं भी काम कर रही हैं।