नहीं मिल रहे नाइट किलर!, रात में चूहे मारनेवालों की जारी है खोज

मनपा कीटनाशक विभाग को इन दिनों एक चिंता सता रही है। कीटनाशक विभाग विगत कई दिनों से ‘नाइट किलर’ की तलाश कर रहा है लेकिन उसे सभी वॉर्डों के लिए नाइट किलर मिल नहीं रहे हैं। घबराइए मत यह नाइट किलर किसी इंसान को मारने के लिए नहीं बल्कि इंसानों की जान और माल को नुकसान पहुंचानेवाले चूहों को मारने के लिए हैं। मनपा इन्हें ही खोज रही है। मनपा में कुछ दिनों पहले तक नाइट रैट किलर की टीम कार्यरत थी लेकिन अब उनकी ड्यूटी सुबह की हो गई है। इसलिए कीटनाशक विभाग अब ऐसे संस्था को ढूंढ रही है जो यह कार्य कर सके लेकिन किसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।
बता दें कि मुंबई में प्री-मॉनसून ने दस्तक दे दी है। मॉनसून में मुंबईकरों को होनेवाली कई बीमारियों में से एक लेप्टोस्पाइरोसिस है जो चूहे के मलमूत्र के संपर्क में आने से होता है। मनपा के कीटनाशक विभाग द्वारा चूहों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाने के लिए दिन-रात उनका शिकार किया जाता है। इस वर्ष जनवरी से लेकर ३१ मार्च तक कीटनाशक विभाग ने २४ वॉर्ड में कुल १ लाख ४५ हजार ६२६ चूहे मारे हैं। कीटनाशक विभाग के अधिकारियों की मानें तो रात में चूहे खाने की खोज में बाहर निकलते हैं। ऐसे में उन्हें मारने में आसानी होती है और आम लोगों को भी कोई तकलीफ नहीं होती है। पिछले कई दशक से शहर के ८ से ९ वॉर्ड में नाइट रैट किलर की टीम चूहों का शिकार करती है लेकिन अक्सर रात में काम करनेवाले कर्मचारी दिन में काम करने की मांग करते हैं। रात में काम करनेवाले कई कर्मचारी अब दिन में काम कर रहे हैं। ऐसे में अब मनपा नाइट रैट किलर ढू़ंढ रही है। मनपा कीटनाशक विभाग के प्रमुख राजन नरिंगरेकर ने बताया फिलहाल १४ वॉर्ड में रात में चूहे मारने का कार्य जारी है लेकिन अब हम पूरे २४ वॉर्ड के लिए ऐसी संस्थाओं को खोज रहे हैं, जो हमारी इस काम में मदद करें लेकिन कोई आगे नहीं आ रहा है। वर्तमान में हम एक चूहे को मारने के पीछे १८ रुपए भी दे रहे हैं। गौरतलब है कि वर्ष २०१८ में चूहे के मलमूत्र से होनेवाले लेप्टोस्पाइरोसिस बीमारी के कारण १२ लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी थी जबकि २६८ लोग में इस बीमारी की पुष्टि हुई थी। इस वर्ष जनवरी से लेकर मई महीने में ही लेप्टो के २० मामले सामने आए हैं।