" /> नहीं रहे पूर्वांचल के ‘कर्मयोगी’ रामप्रताप सिंह, पूर्वी यूपी में सैकड़ों सरस्वती शिशु मंदिरों की रखी थी आधारशिला

नहीं रहे पूर्वांचल के ‘कर्मयोगी’ रामप्रताप सिंह, पूर्वी यूपी में सैकड़ों सरस्वती शिशु मंदिरों की रखी थी आधारशिला

कांग्रेसीराज व इमरजेंसी के दिनों जब  आरएसएस अस्तित्व कायम रखने के लिए संघर्षशील था, उस वक़्त पूर्वांचल में एक संघनिष्ठ कर्मयोगी ने भारतीय संस्कृति व सभ्यता में रची-पगी शिक्षा की अलख जगा रहा था। ये थे अमेठी के भीमी निवासी रामप्रताप सिंह उपाख्य ‘प्रधानाचार्य जी’! करीब साढ़े तीन दशकों तक रामप्रताप सिंह ने संघ के शिशुशिक्षा प्रबंध से जुड़कर पूर्वी यूपी के दर्जनों व जिलों में सैकड़ों शिशु मंदिरों की आधारशिला रखी..और जीवनपर्यंत  ‘संघनिष्ठ’ रहे। आज देर शाम उनका सुल्तानपुर के विवेकाननंदनगर स्थित आवास पर ९४ वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार थे। कर्मयोगी सिंह के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा हुआ है।
साठ के दशक में स्व. सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिशुमन्दिर योजना    के संपर्क में आए। सुल्तानपुर शहर में ५ वीं कक्षा तक संचालित सरस्वती शिशु मंदिर का श्रीगणेश कराया और फिर पश्चिमी यूपी के बुंदेलखंड भेज दिए गए। ललितपुर व झांसी में भी उन्होंने प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करने के बाद १९७४ में सुल्तानपुर वापसी की।..और फिर इमरजेंसी में जब संघ को तत्कालीन पीएम इंदिरागांधी ने प्रतिबंधित कर दिया था उस वक़्त रामप्रताप सिंह निर्बाध गति से संघप्रेरित शिक्षा अभियान को गति देने में लगे रहे। इस मिशन में उस वक़्त उन्हें साथ मिला संघ प्रचारकगण रामअवध जी,रामलखन जी, उदयभान जी व वकील ठाकुर गंगाबख्श सिंह,प्रमुख व्यवसायी गोवर्धन कानोडिया का। तो वहीं उस दौर के कई प्रभावशाली पुलिस अफसरों बंशराज सिंह विसेन व एमपी सिंह आदि ने  भी सत्ता के प्रभाव में आए बगैर विद्यालय स्थापना समेत संस्कृति संरक्षण के कार्यों में रामप्रताप जी का बेधड़क होकर साथ दिया। सुल्तानपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, जौनपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, गोरखपुर व बस्ती आदि जिलों में शिशु शिक्षा प्रबंध समिति व जान शिक्षा समिति के प्रदेश निरीक्षक के रूप में अनेकों विद्यालयों का संचालन शुरू कराया। वे ग्राम भारती के निदेशक भी रहे। स्वभाव से तपस्वी ‘सिंह’ ने अपने व अपने परिवार के भौतिक सुख के लिए कुछ करने की बात दूर बड़े बेटे कुंवर को भी संघ प्रचारक की दीक्षा दिला ‘राष्ट्रसेवा’ के लिए समर्पित कर दिया। करीब ५ साल से वो ज्यादा बीमार थे। घर पर ही बेड पर थे। उनके अवसान पर हिंदूवादी संगठनों, शैक्षिक जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। उनके अंतिम दर्शन के लिए बीजेपी एमएलए सूर्यभान सिंह, क्षत्रिय शिक्षा समिति के अध्यक्ष संजय सिंह, देवनारायण आचार्य, भाविप के अनिल बरनवाल , विहिप के शुभ नारायण सिंह समेत सैकड़ों लोग पहुंचे। ये सिलसिला अनवरत जारी है। द्वितीय पुत्र सुरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि पिताजी की इच्छानुसार उनका अंतिम संस्कार भगवान राम की तपोस्थली श्रृंगवेरपुर में किया जाएगा।