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नागपंचमी होगी खास बन रहे हैं विशेष संयोग

नागपंचमी का त्यौहार हर साल सावन माह की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है, जो कि इस बार २५ जुलाई को मनाया जाएगा। नागपंचमी पर देश के कोने-कोने में नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार नागपंचमी पर विशेष संयोग बन रहे हैं। पहला यह कि इस दिन कल्कि भगवान की जयंती भी है और साथ ही इसी दिन विनायक चतुर्थी व्रत का पारण भी होगा। इस वजह से इस त्यौहार में यह खास संयोग है।

इस बार श्रावण शुक्ल पंचमी शनिवार को है, साथ ही दोपहर के बाद पूरे समय चंद्रमा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इसके चलते रवियोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रवि योग में नागदेवता की पूजा-आराधना करने से कर्ज मुक्ति, स्वास्थ्य और सर्जरी के कार्य का बेहतर लाभ मिलता है। साथ ही विभिन्न प्रकार के दोष अपने आप ही खत्म हो जाते हैं, जिसकी कुंडली में राहु, केतु के साथ सूर्य बैठा हो अथवा ग्रहण योग, कर्ज योग आदि होते हैं तो वह नागपंचमी पर रवियोग में पूजा-आराधना कर नाग-नागिन के जोड़े को जंगल में सपेरों से मुक्त कराए। गोशाला में गायों के लिए चारा दान करे। इससे जातक की कुडंली में राहु, केतु की पीड़ा, ग्रहण दोष, कर्ज मुक्ति आदि परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।
नागपंचमी में धार्मिक और सामाजिक महत्व के साथ ही ज्योतिष में भी नागपंचमी का महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में योगों के साथ दोषों को भी देखा जाता है। इसमें कालसर्प दोष बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कालसर्प दोष के साथ ग्रहण दोष, श्राप दोष, राहु, केतु की पीड़ा के लिए भी ज्योतिषाचार्य हमेशा नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा के साथ दान दक्षिणा का सर्वाधिक महत्व मानते हैं। यदि आप भी नाग पंचमी का व्रत रखते हैं या फिर रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको चतुर्थी तिथि को दिन में केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए। वहीं पंचमी का व्रत नाग देवता की पूजा-अर्चना कर शाम को खोलना चाहिए।
महादेव को प्रिय हैं सर्प
भगवान शिव को सर्प सबसे अधिक प्रिय हैं। सावन मास के देवता भगवान शिव माने जाते हैं। श्रावण में नागपंचमी को मनाने के पीछे की एक खास वजह यह है कि नाग देवता को पंचमी तिथि का स्वामी माना जाता है। नाग का भगवान भोलेनाथ से गहरा नाता है। नागदेवता, भगवान शिव के गले की शोभा बढ़ाते हैं। वासुकि सदा भगवान शिव के गले में विराजित रहते हैं।
ऐसे करें नाग देवता की पूजा
नागपंचमी की पूजा और व्रत के आठ नाग देव माने जाते हैं, जिनके नाम अनंत, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख है। अष्टनागों की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। नागपंचमी के दिन व्रत का विधान भी है, जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं वे नाग देवता की विशेष रूप से पूजा करते हैं। क्योंकि श्रावण में वर्षा के कारण जमीन के अंदर बिलों में रहनेवाले सांप भी निकलकर बाहर आ जाते हैं। बाहर निकलकर आनेवाले नाग किसी का अहित न करें अथवा इंसानों द्वारा नागों का अहित न हो, इसके लिए भी नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन आमजन नागदेवता की पूजा-आराधना करते हैं, जिससे उनके मन में भी नागों के प्रति भक्तिभाव जागृत होता है।
पूजा करने के लिए नाग चित्र या मिट्टी की सर्प मूर्ति बनाकर इसे लकड़ी की चौकी के ऊपर स्थापित करें और चतुर्थी के दिन एक बार भोजन कर पंचमी के दिन उपवास करके शाम को भोजन करना चाहिए। हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें। कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर सर्प देवता को अर्पित करें। पूजन करने के बाद सर्प देवता की आरती उतारी जाती है और अंत में नाग पंचमी की कथा अवश्य सुनें।
न करें ये काम
किसान लोग नाग पंचमी के दिन गलती से भी खेत में हल न चलाएं, इससे उन्हें भारी नुकसान हो सकता है।
नाग पंचमी के दिन सुई-धागे का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस दिन गलती से भी सुई में धागा न पिरोएं।
नाग पंचमी के दिन गैस पर तवा नहीं रखना चाहिए। अगर ऐसा कोई करता है तो सांपों को तकलीफ होती है और न ही किसी से लड़ाई-झगड़ा करना चाहिए। इस दिन परिवारजनों से कोई कटु शब्द न कहे।
नाग पंचमी के दिन लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दिन लोहे के बर्तन में न तो खाना बनाएं और न ही खाएं।

नाग पंचमी तिथि
२५ जुलाई, २०२०
पूजा मुहूर्त – ०५:४३ से ८:२५ ( २५ जुलाई, २०२०)
पंचमी तिथि प्रारंभ – १४:३३ (२४ जुलाई, २०२०)
पंचमी तिथि समाप्ति – १२:०१ (२५ जुलाई, २०२०)