नारकीय जीवन जीने से अच्छा है हमें मार डालो!

माहुलवासी विगत डेढ़ वर्ष से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रदूषण और दुर्गंध के कारण अब तक डेढ़ सौ लोग मौत के मुंह में समा गए हैं। इतना होने के बाद भी सरकार हमारी सुन नहीं रही है। संतप्त माहुलवासियों ने कहा कि सरकार को अगर हमें मारना ही है तो सामने आकर खुलेआम हमें मार डाले। नारकीय जीवन जीने से अच्छा है हमें मार डालो। विद्याविहार स्थित तानसा पाइपलाइन के पास खुली जगह पर बैठकर स्थानीय लोगों ने सरकार की अनदेखी के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। आंदोलन में शामिल लोगों में से करीब ५० माहुलवासियों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें अपनी हिरासत में लेकर आंदोलन की हवा निकालने का प्रयत्न किया।
बता दें कि मुंबई में विभिन्न विकास योजनाओं के कारण प्रभावित लोगों का माहुल में पुनर्वसन किया जा रहा है। इस क्षेत्र में लगभग १६ कारखाने और तीन रिफायनरी हैं। यहां होनेवाले प्रदूषण के कारण निवासियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर विगत डेढ़ वर्षों से माहुल प्रकल्पग्रस्त समिति की ओर से अन्य जगहों पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। आंदोलनकर्ताओं और पुलिस के बीच शिवसेना विधायक कुडालकर ने मध्यस्थता कर आंदोलन आगे भी जारी रखने की बात कही। दूसरी ओर कल माहुलवासियों ने शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे से शिवसेना भवन में मुलाकात कर अपनी व्यथा व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि शिवसेना माहुलवासियों के साथ पूरी दमखम से खड़ी रहेगी।
माहुल में हो सरकार का कार्यालय
हम लगातार सरकार से पत्र व्यवहार कर रहे हैं, ऐसा बोलते हुए शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार का कार्यालय अगर वहां कर दिया जाए तब जाकर माहुलवासियों का दु:ख उन्हें पता चलेगा।