" /> ‘नारी शक्ति पुस्कार’ सम्मानित महिलाओं से मिले पीएम मोदी, सुनी उनकी प्रेरक कहानी, उन्हीं की जुबानी

‘नारी शक्ति पुस्कार’ सम्मानित महिलाओं से मिले पीएम मोदी, सुनी उनकी प्रेरक कहानी, उन्हीं की जुबानी

पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित १५ में से १४ वुमन अचीवर्स से मुलाकात की। इन महिलाओं ने इस दौरान जीवन की कठिनाइयों के बीच समाज में दिए गए अपने योगदान की कहानी पीएम नरेंद्र मोदी से विस्तार से साझा की। इसमें १०३ साल की एथलीट मान कौर थीं तो ९६ साल की उम्र में साक्षरता परीक्षा में टॉप करनेवाली कार्तियायनी अम्मा भी।
१०३ साल की एथलीट मान कौर, वायु सेना की पहली महिला फाइटर पायलट मोहना सिंह, भावना कांत और अवनि चतुर्वेदी, किसान पडाला भूदवी और बीणा देवी, शिल्पकार आरिफा जान, पर्यावरण विद चामी मूर्मू, उद्यमी निलजा वांगमू, ऑटोमोटिव रिसर्च प्रोफेशनल रश्मी उर्धावरदेशे, राजमिस्त्री कलावती देवी, पर्वतारोही ताशी और नुंगशी मलिक, गायिका कौशिकी चक्रवर्ती और साक्षरता परीक्षा में २०१८ में टॉप करनेवाली ९८ साल की कार्तियायिनी अम्मा। एक अन्य पुरस्कार विजेता भगीरथी अम्मा (१०५) किसी कारणवश दिल्ली नहीं आ पार्इं। पीएम मोदी ने बेहद गौर से एक-एक महिला की कहानी सुनी और उन्हें आनेवाले भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
बेटियां होने पर पति ने छोड़ा पर जीवित रहा जीवट
इन महिलाओं में एक तेलंगाना की किसान पडाला भूदेवी भी शामिल हैं। पडाला ने पीएम मोदी को अपनी आप-बीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वैâसे ३ बेटियां होने पर उनके पति ने उन्हें छोड़ दिया था, तब उनकी बड़ी बेटी की उम्र महज ३ साल और सबसे छोटी की उम्र २ महीने थी। पडाला को पिता के घर लौटना पड़ा। हालांकि मायके वापस आकर वह निराश नहीं बैठीं बल्कि पिता के साथ ग्राम सभा का काम सीखा और आज एक सफल किसान हैं।
पता नहीं था कि महिलाएं फाइटर जेट नहीं उड़ातीं
पीएम मोदी से मुखातिब होनेवालों में देश की पहली महिला फाइटर पायलट मोहना, भावना और अवनि भी शामिल थीं। इन तीनों ने अपने करियर के रोमांच और फाइटर जेट उड़ाने के अनुभव को साझा किया। बिहार के दरभंगा की भावना ने पीएम मोदी को बताया कि जब उन्होंने वायुसेना के पायलट के रूप में करियर बनाने का सोचा तो उन्हें यह भी नहीं पता था कि महिलाएं फाइटर जेट नहीं उड़ातीं।
‘सर, इंटरनेट बंद होने से हुई दिक्कत’
इन महिलाओं में कश्मीरी शिल्पकार अरफा भी थीं, जिसे आज पीएम मोदी ने अपना सोशल मीडिया हैंडल भी इस्तेमाल करने का अवसर दिया है। क्रॉफ्ट मैनेजमेंट में पीजी करनेवाली आरिफा कश्मीर की उन हस्तकलाओं को नया जीवन दे रही हैं जो मृतप्राय हो गई थीं। आरिफा कारीगरी पश्मीना, नामदा और कढ़ाई को बढ़ावा दे रही हैं और उनके काम से अब तक ५७ महिलाएं जुड़ी हुई हैं और अपनी आजीविका चला रही हैं। आरिफा का मकसद न सिर्फ कला को बढ़ावा देना बल्कि कारीगरों को उनका वाजिब हक दिलाना भी है। हालांकि इसी बीच वह बोल पड़ी कि सर, कश्मीर में इटंरनेट बंद होने से ६ महीने में काम पर असर पड़ा है। उनके इतना कहने पर पीएम मोदी भी मुस्करा उठे।

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