" /> नालासफाई के नाम पर मनपा तिजोरी की लूट

नालासफाई के नाम पर मनपा तिजोरी की लूट

# पांच ठेकेदारों को 1 करोड़, 53 लाख में दिया ठेका
# सफाई के नाम पर की जा रही खानापूर्ति की जांच की मांग तेज

भिवंडी मनपा ने आखिरकार नालासफाई का ठेका पांच ठेकेदारों को पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना की बढ़ोत्तरी कर दिया गया है, जो नालासफाई के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि मनपा प्रशासन ने यह ठेका मॉनसून नालासफाई का नहीं बल्कि मनपा की तिजोरी की लूट के लिए है।
मालूम हो कि भिवंडी मनपा ने पांच अलग-अलग कंपनियों को तकरीबन एक करोड़, 57 लाख, 32 हजार, 543 रुपए में नालासफाई का ठेका दिया है। इन ठेकेदारों ने ठेका तो ले लिया है लेकिन अभी तक नालों की सफाई पूरी हो जानी चाहिए थी परंतु मजदूरों के अभाव में नालों की सफाई नहीं कर पा रहे हैं। अब जब बारिश शुरू हो गई है तो अभी तक 50 फीसदी भी नाले की सफाई नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं सूत्र तो बताते हैं कि ठेकेदार किसी तरह समय बिताकर बारिश के आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि नालों का कचरा भी पानी के साथ बह जाए और उन्हें सफाई भी न करनी पड़े। इधर देर से नालासफाई का टेंडर आने को लेकर व ठेकेदारों द्वारा काम में की जा रही लापरवाही के मद्देनजर ठेकेदारों का विरोध शुरू हो गया है। लोगों ने मनपा द्वारा देर से शुरू की गई नालासफाई पर रोक लगाने की मांग मनपा प्रशासन से की है। उक्त लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यह नालासफाई का ठेका नहीं बल्कि आर्थिक तंगी से बेहाल मनपा की तिजोरी की सफाई का ठेका है। उक्त लोगों ने कहा कि जब बारिश के पहले गटरों की सफाई ही नहीं हो पाएगी तो फिर टेंडर निकालकर प्रशासन को मुफ्त में पैसे देने की क्या जरूरत है। इतने विरोध के बावजूद मनपा इसे गंभीरता से न लेकर नालों की सफाई मनपा अधिकारी कागजों पर पूरा कर अपनी हिस्सेदारी के लिए करने में जुटे हैं। इस कारण मनपा स्वास्थ्य विभाग के कार्यकलापों पर प्रश्नचिह्न लग गया है। हैरानी की बात यह है कि मनपा अधिकारियों व ठेकेदारों के बीच नालासफाई के नाम पर की जा रही बंदरबांट पर मनपा के तमाम जनप्रतिनिधि मौन हैं, जिसे लेकर लोगों में आश्चर्य व्याप्त है।