नाला सफाई की मलाई, आता है १,०७५ रुपए, मजदूर को मिलता है ४०० रुपए

मॉनसून आने से पहले शहर के नालों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि इस वर्ष नालों की सफाई का काम देर से शुरू हुआ है। सफाई कार्य के लिए मनपा ने लगभग तीन करोड़ का आर्थिक बजट पास किया है। इसके बावजूद मजदूर को न तो उसके निर्धारित मजदूरी मिल रही है, न ही उनको सुरक्षा के उपकरण।
ज्ञात हो कि मीरा-भाइंदर में कुल १५५ छोटे-बड़े नाले हैं। अक्सर अप्रैल महीने से ही नालों की सफाई कार्य शुरू किया जाता है लेकिन इस वर्ष सफाई का काम लगभग तीन सप्ताह देरी से शुरू किया गया है। नालों की सफाई के लिए मनपा ने ३ करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। मनपा द्वारा प्रतिदिन प्रति मजदूर १,०७५ रुपए की दर से भुगतान करना निश्चित किया गया है।
मजदूरों को नहीं मिल रही निर्धारित मजदूरी
मीरा-भाइंदर मनपा ने सफाई के लिए १,०७५ रुपए प्रति मजदूर प्रतिदिन निर्धारित किया है लेकिन सफाई का ठेका लेनेवाली कंपनी मजदूरों को मात्र प्रतिदिन प्रति पुरुष मजदूर ४०० रुपए और महिला मजदूर को ३०० रुपए का भुगतान करती है।
कभी भी हो सकता है हादसा
नाला सफाई का काम करनेवाले सफाईकर्मियों के पास सुरक्षा का कोई सामान उपलब्ध नहीं है। हाल ही में भाइंदर, नालासोपारा में सुरक्षा कवच के बगैर सेफ्टी टैंक की सफाई करने उतरे कई मजदूरों की जानें चली गई थी। ऐसी घटनाओं के बावजूद इन मजदूरों से काम करवानेवाली कंपनी ने कोई सीख नहीं ली है। सफाईकर्मी गमबूट, मास्क, दस्ताने जैसे उपयोगी सामान के बगैर जोखिम में जान डालकर सफाई कार्य कर रहे हैं।
नाला सफाई के उपयोग में आनेवाले अलग-अलग उपकरणों जैसे जेसीबी, पोकलेन, वोट सह पोकलेन इत्यादि का भुगतान मनपा २,०५० रुपए से लेकर ३०,००० रुपए प्रति घंटा/प्रति शिफ्ट के हिसाब से कर रही है लेकिन किन उपकरणों का कितने घंटे या कितनी शिफ्ट में उपयोग हुआ, इसकी सत्यता की जांच वैâसे हो पाएगी? यह सवाल पैदा होता है। इस मामले में मनपा आयुक्त बालाजी खतगावकर का कहना है कि हम ठेकेदार को भुगतान के समय लॉग बुक की एंट्री, हर वॉर्ड में इनकी निगरानी करनेवाली टीम के रिपोर्ट की जांच कर भुगतान करेंगे।