निकाला अखाड़े से सोना सुशील, राहुल का दांव चला, बबिता की चांदी

कल सुबह से कुश्ती का आधुनिक अखाड़ा सजा हुआ था और हिंदुस्थानी पहलवान सुशील कुमार तमाम प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए फाइनल में जा पहुंचे थे। सिर्फ सुशील कुमार ही नहीं बल्कि राहुल अवारे भी पीछे-पीछे फाइनल में पहुंच गए थे तो उधर महिला वर्ग में बबिता भी फाइनल में थीं। पूरा दिन स्वर्ण दिन की तरह था क्योंकि कुश्ती में पदक निश्चित हो चुके थे। अब इंतजार था तो इसका कि सोना कितना मिलता है। फाइनल जब शुरू हुए तो हिंदुस्थानी दिल की धक-धक के बीच सुशील कुमार अखाड़े में उतर चुके थे। सामने थे दक्षिण अफ्रीका के पहलवान जोहानेस बोथा। ये सुशील की स्टाइल ही है कि फाइनल में वो ऐसा दांव लगाते हैं, जिसकी कल्पना भी विरोधी नहीं कर पाता। अभी आंख झपकती कि इतने में रेफरी ने सुशील कुमार को विजेता घोषित कर दिया। जी हां, पलक झपकते ही सुशील ने बोथा पर ऐसा दांव मारा कि उसे कुछ भी समझ में नहीं आया और मिनट भर में ही सुशील ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाकर पूरे विश्व में अपनी पहलवानी का सिक्का जमा लिया। ये सुशील ही थे, जिन्होंने २०१० में भी गोल्ड मेडल जीता था और दो बार ओलिंपिक पदक विजेता भी थे। हिंदुस्थानी कुश्ती के हीरो सुशील कुमार ने एक बार फिर अपने आप को साबित किया कि वो अभी चुके नहीं हैं।
२१वें कॉमनवेल्थ गेम्स का ये ८ वां दिन था जब रेसलर सुशील कुमार ने ७४ किलोग्राम भार वर्ग मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी को हराकर देश को चौथा गोल्ड दिला दिया। हिंदुस्थान के दिग्गज पहलवान सुशील कुमार ने केवल एक मिनट के भीतर ही अपने प्रतिद्वंद्वी को चित करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में अपने स्वर्ण पदकों की हैट्रिक कर दी। सुशील ने पुरुषों की ७४ किलोग्राम वर्ग स्पर्धा में दक्षिण अफ्रीका के जोहानेस बोथा को १०-० से मात देकर राष्ट्रमंडल खेलों का तीसरा स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले सुशील ने २०१० दिल्ली और २०१४ ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे। इस जीत के साथ ही उन्होंने अपने पदकों की हैट्रिक पूरी की है। सुशील कुमार ने दो ओलिंपिक मेडल भी जीते हैं। वे ओलिंपिक में कांस्य और सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। रियो ओलिंपिक में उन्हें जाने का मौका नहीं मिल पाया। सुशील ने बोथा को पहले ही मिनट में पूरा पलटते हुए चार अंक लिए और इसके बाद उन्हें नीचे पटकते हुए दो और अंक हासिल कर लिए। हिंदुस्थानी दिग्गज पहलवान सुशील ने बोथा को संभलने का मौका भी नहीं दिया और एक बार फिर उन्हें पटकर चार और अंक हासिल किए और स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले सेमीफाइनल में सुशील ने ऑस्ट्रेलिया के कोनोर इवांस को ४-० से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया था। सुशील ने तकनीकी तौर पर मोहम्मद को मात दी। इधर सुशील का कारनामा खत्म हुआ ही था कि उधर राहुल अवारे ने गोल्ड जीत लिया। उन्होंने ५७ किलो वर्ग के फाइनल में कनाडा के स्टीवन ताकाहाशी को १५-७ से हराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में राहुल का यह पहला पदक है। वहीं महिला वर्ग में रजत पदक से संतुष्ट होना पड़ा क्योंकि बबिता ये मुकाबला हार गर्इं। रेसलर बबीता कुमारी ने ५३ किलो कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है। गोल्ड के लिए फाइनल में उनका मुकाबला कनाडा की डायना वीकर के साथ था। मगर वो उसे हरा नहीं पाई। फिर भी कल का दिन अखाड़े से सोना निकालने का रहा, वैसे इससे पहले निशानेबाजी में हिंदुस्थान चमक ही रहा था। शूटर तेजस्विनी सावंत ने ५० मीटर राइफल इवेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया। तेजस्विनी ६१८.९ अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं,जबकि सिंगापुर की मार्टिना लिंडसे ने रिकॉर्ड ६२१.० अंक हासिल कर गोल्ड पर कब्जा जमाया। स्कॉटलैंड की सिओनेड (६१८.१) ने ब्रॉन्ज जीता। इसी स्पर्धा में हिंदुस्थान की अंजुम मौदगिल (६०२.२) १६वें नंबर पर रहीं। दिलचस्प ये है कि अकेले शूटिंग में ही हिंदुस्थानी खिलाड़ी अब तक १२ मेडल जीत चुके हैं।