निरुपम की हार पर कांग्रेस में जश्न

किसी भी प्रत्याशी की जीत के पीछे सबसे बड़ा हाथ कार्यकर्ताओं व सहयोगी नेताओं का होता है। यदि उक्त लोग अपने ही प्रत्याशी के विरोध में हों तो हार तो निश्चित है। उत्तर-पश्चिम मुंबई लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम को करारी शिकस्त मिली है। निरुपम की हार के बाद कुछ कांग्रेसियों द्वारा जश्न मनाए जाने की चर्चा अब जोर पकड़ रही है। कुछ कांग्रेसियों की मानें तो गुटबाजी निरुपम को ले बीती।
बता दें कि उत्तर-पश्चिम मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना प्रत्याशी गजानन कीर्तिकर ने मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम को २,५१,२५० मतों से पराजित किया। कांग्रेसी गलियारों में चल रही कानाफूंसी पर अगर भरोसा करें तो कांग्रेस की आपसी गुटबाजी निरुपम को ले डूबी है। तत्कालीन कांग्रेसी नेता गुरुदास कामत के निधन के बाद से ही निरुपम की नजर उक्त सीट पर गढ़ी पर हुई थी। मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद से निरुपम ने कामत समर्थकों को साइड लाइन करना शुरु कर दिया था। सबसे पहले निरुपम ने मनपा में विपक्षी नेता रहे और कांग्रेस समर्थक आंबेरकर को हटाया था। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे एक-एक को हटाना शुरू किया था। कामत निरुपम से पहले से ही नाराज थे। एक कांग्रेसी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कामत समर्थकों के अलावा कई और दिग्गज कांग्रेसी नेता निरुपम से खफा थे। अपनी इस नाराजगी का बदला निरुपम से लेने के लिए वे ताक में थे। इसीलिए निरुपम की हार पहले से ही कार्यकर्ताओं ने तय कर दी थी। कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा निरुपम को जिताने की बजाय उनको हराने के लिए काफी गुपचुप प्रचार व प्रसार कर रहे थे। चर्चा यह भी है कि निरुपम की हार के बाद कुछ कांग्रेसियों ने बंद कमरे में जश्न भी मनाया। एक बात तो साफ है यदि कांग्रेस में चल रही कलह और गुटबाजी खत्म नहीं होती है तो कांग्रेस का पत्ता आनेवाले विधानसभा चुनाव में भी साफ हो जाएगा।