" /> निर्दोष!, सात साल बाद मिटा कलंक

निर्दोष!, सात साल बाद मिटा कलंक

दहेज के लिए नव वधुओं की हत्या आज आम बात हो चुकी है। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कड़े कानून बना रखे हैं लेकिन नवविवाहिता एवं उसके परिजनों द्वारा पति और उसके खिलाफ लगाए जानेवाली दहेज प्रताड़ना एवं यौन उत्पीड़न के आरोप हर बार सही ही हों, ऐसा भी नहीं है। आजकल ससुराल पक्ष को डराने और धमकाने के लिए बहुएं दहेज उत्पीड़न कानून का जमकर दुरुपयोग कर रही हैं, ऐसे मामले अक्सर देखने और सुनने को मिल जाते हैं। विवाह के महज दो महीने बाद लापता हुई ऐसी ही एक नवविवाहिता की दिलचस्प कहानी सामने आई है। उक्त गुमशुदा नववधू अपने प्रेमी के साथ ठिकाना बदलकर रह रही थी, जबकि उसके परिजनों ने अपने दामाद को बेटी की हत्या और लाश को छिपाने के आरोप में जेल में डलवा दिया था। इस कलंक से मुक्त होने में उक्त निर्दोष को ७ सालों तक संघर्ष करना पड़ा। दरअसल, उक्त बेगुनाह अपनी बीवी की बेवफाई का शिकार बना था।
७ साल पहले ओडिशा की केंद्रापाडा निवासी नवविवाहिता संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गई थी। दरअसल, अभय सुतार का ७ फरवरी, २०१३ को सामगोला गांव की श्रुति (काल्पनिक नाम) से विवाह हुआ था। अभय मूलरूप से ओडिशा के केंद्रापाडा स्थित चौलिया गांव का निवासी था। विवाह के दो महीने बाद श्रुति लापता हो गई थी। १४ मई, २०१३ को श्रुति की गुमशुदगी की रिपोर्ट पाटकुरा पुलिस थाने में दर्ज कराई गई। मामले में नया मोड़ तब आया जब श्रुति के परिजनों ने अभय के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया। उनका आरोप था कि अभय, श्रुति के चरित्र पर संदेह करता था इसलिए उसने श्रुति की हत्या कर उसकी लाश को ठिकाने लगा दिया है। पुलिस को प्रारंभिक जांच में पता चल गया था कि श्रुति के मां-बाप ने अभय से उसका विवाह उसकी मर्जी के खिलाफ कराया था, जबकि वो पहले से ही किसी और को चाहती थी। ऐसे में श्रुति अपने उस प्रेमी के साथ भी भाग सकती है, इस बारे में जांच करने की बजाय पुलिस ने श्रुति के परिजनों की शिकायत पर अभय को गिरफ्तार कर लिया था। उसे लगभग एक महीने तक उस गुनाह के लिए जेल में रहना पड़ा था, जो उसने किया ही नहीं था। कलंक उसे अंदर-ही-अंदर खाए जा रहा था। जमानत पर रिहाई के बाद श्रुति की तलाश को उसने अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बना लिया। अभय को यह शक था कि श्रुति किसी के साथ गायब हुई है। लगातार ७ वर्षों तक वो अपनी गुमशुदा बीवी को ढूंढता रहा, जिसकी हत्या का आरोप उस पर लगा था। अंतत: अभय की मेहनत रंग लाई। श्रुति, पिपली इलाके में अपने प्रेमी के साथ रहते हुए मिली। इन ७ वर्षों में वो अपने कथित प्रेमी के दो बच्चों की मां भी बन गई थी। अभय ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद श्रुति और उसके प्रेमी राजीव लोचन को गिरफ्तार कर लिया गया। श्रुति ने पुलिस को बताया कि वो विवाह से पहले ऑटोरिक्शा चालक राजीव लोचन से प्यार करती थी लेकिन परिजनों ने जबरदस्ती उसकी शादी कर दी। पुलिस ने श्रुति और राजीव को केंद्रापाडा के एसडीजेएम कोर्ट में पेश किया और वहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। अभय ने कहा कि मैं खुश हूं कि सात साल बाद ही सही, मैं अपने आपको बेगुनाह साबित करने में कामयाब हुआ हूं।