" /> निसर्ग तूफान ने उजाड़ा सपनों का आशियाना

निसर्ग तूफान ने उजाड़ा सपनों का आशियाना

कहते है  ‘आखों से आंसू बहे तो वो भी अपने नहीं रहते, बुरा इस बात का लगता है कि, गम उसके साथ नहीं बहते ।’ कुछ इसी तरह की कहानी है रायगड जिले के रोहा तालुका के चांड गांव की है , जहां एक तरफ कोरोना ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर ही दिया था, वहीं दूसरी तरफ कुदरत ने यह दिखा दिया के उससे शक्तिशाली और कोई नहीं। दो दिन पहले चांड गांव में आए निसर्ग तूफान ने वहां के लोगों का आशियाना तहस-नहस कर दिया। कहीं लोगों के घर के छत उड़ गए तो पूरे गांव में तूफान की वजह से गिरे हुए पेड़ों ने आने-जाने के लिए दिक्कतें पैदा कर दी है। तूफान ने गांव के लोगों की जिंदगी पूरी तरह से बदल दी है और पहले जो कोरोना की वजह से उनकी जिंदगी में जो मायूसी छाई थी, उसमें आशियाना उजड़ने का गम उनके चेहरे पर साफतौर पर दिखाई दे रहा है । स्थानीय लोगों का कहना है कि जो नुकसान हुआ है उसे राहत मिलने के लिए सरकार की तरफ से मदद की जाए और भविष्य में फिर से ऐसी प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए सरकार सख्त कदम उठाए।