" /> नेपाल के जहन में है!

नेपाल के जहन में है!

नेपाल की सीमा से हिंदुस्थान में गोलीबारी की गई। अब अति हो गई। ये रवांडा देश के प्रमुख द्वारा वाशिंगटन और मास्को में प्रवेश करके प्रे. ट्रम्प या पुतिन को थपड़ियाने जैसा है। गोलीबारी करनेवाली नेपाली पुलिस थी। इसमें बिहार के एक किसान की मौत हो गई। चार लोग घायल हो गए। ये लक्षण अच्छे नहीं हैं। चीन-पाकिस्तान सीमा पर लगातार झड़पें होती रहती हैं। हमारे सैनिक और आम लोग शिकार होते हैं। हमारे सैनिक दुश्मन को जोरदार तरीके से जवाब दे रहे हैं, लेकिन अब अगर नेपाल भी हम पर बौखला रहा है, तो इसे अति ही कहा जाएगा। चीन पहले ही लद्दाख सीमा पर सैनिकों की तैनाती कर चुका है। पाकिस्तान के हमले और घुसपैठ रुक नहीं रहे हैं। अनंतनाग में अजय पंडित नामक एक कश्मीरी पंडित की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। अजय पंडित अनंतनाग के लुकबावन गांव के सरपंच थे। अनुच्छेद ३७० हटाने के बावजूद कश्मीरी पंडित घरवापसी नहीं कर पाए और जो हिम्मत जुटाकर वहां रह रहे हैं, उन्हें इस तरह से मार दिया जा रहा है। इस घटना पर न तो संघ परिवार और न ही भाजपा ने टिप्पणी की। कुल मिलाकर, आज भी देश की सीमाओं पर अराजकता का माहौल है। सभी सीमाओं पर तनाव है। अफसोस ये है कि इसमें अब नेपाल भी शामिल हो गया है। नेपाल ने अपने नक्शे में हिंदुस्थान का कुछ हिस्सा दिखाया है। इस मानचित्र को नेपाल सरकार द्वारा मान्यता दी गई और नेपाल के नेता इस बाबत कुछ सुनने के मूड में नहीं लग रहे। हम इसलिए कह रहे हैं कि नेपाल के नए नक्शे के बारे में संवैधानिक संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से नेपाल की संसद द्वारा मंजूर किया गया है। इसलिए चर्चा के दरवाजे बंद होते दिख रहे हैं। नेपाल के नए नक्शे के मामले में कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख हिंदुस्थान का नहीं बल्कि हमारा है, ऐसी चेतावनी नेपाल ने दी है। इन सबके बावजूद हमारे प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री नेपाल के बारे में कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं हैं और हमारे सेनाध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे कह रहे हैं कि नेपाल के साथ हमारे संबंध अच्छे हैं। नेपाल के साथ हमारा सीमा विवाद पहले से था, लेकिन यह मामला कभी इतना गंभीर नहीं हुआ था। नेपाल कभी हिंदुस्थान पर गुर्राने की फिराक में नहीं पड़ा था। लेकिन अब वह दहाड़ रहा है। इसके क्या कारण हैं? हाथी सी ताकत नेपाल में कहां से आई? दरअसल, यह हाथी की शक्ति नहीं है, बल्कि नेपाली नेताओं में चीनी ड्रैगन के संचार होने के लक्षण हैं। जनरल नरवणे का कहना है कि हमारे नेपाल के साथ भौगोलिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच संबंध बेहतरीन हैं। हमारे पास दोनों देशों के लोगों को एक साथ लाने के लिए अच्छे लोग हैं। हमारे बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे। दरअसल, सेनाप्रमुख का ऐसा कहना सही ही है। संबंध अच्छे थे, यह तो भूतकाल हुआ। हालांकि अब नेपाल हमारा मित्र नहीं रहा। उसने अब चीन के इशारे पर अपने भविष्य की रूपरेखा बनाई है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चीन नेपाल को फिरौती देता है। बदले में नेपाल, हिंदुस्थान पर गुर्रा रहा है। चीन, हिंदुस्थान के सिरदर्द को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल और हिंदुस्थान के धार्मिक और साथ ही ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं, लेकिन इन संबंधों में विश्वास करनेवाली पीढ़ी नेपाल में नहीं बची है और वे चीन को ही अपना माई-बाप मानते हैं। यह प्रभु श्रीराम के ससुराल और सीता मैया के मायके नेपाल के बीच का धार्मिक संबंध है। हालांकि, चीनियों ने इसी दौरान नेपाल से हिंदुत्ववाद को खत्म कर दिया है। इससे यह स्पष्ट है कि नेपाल भविष्य में सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल द्वारा सीमा पर गोलीबारी उसी सिरदर्द की शुरुआत है। हिंदुस्थान में लाखों नेपाली लोग काम कर रहे हैं। किसी ने इस बारे में शिकायत नहीं की। हिंदुस्थान की सेना में एक गोरखा रेजिमेंट है और सभी को उस गोरखा रेजिमेंट पर गर्व है। आज भी नेपाल के गोरखा ही हिंदुस्थान के मुख्य स्थानों पर पहरा देते हैं और किसी ने भी उनकी वफादारी पर कभी संदेह नहीं किया है। मुंबई जैसे शहर में नेपाली युवा चाइनीज भोजन के ठेले लगाते हैं और किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई है। ये रिश्ते इतने मधुर हैं। अब जब नेपाल के सत्ताधीशों ने कमर कस ली है तो कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि इन नेपाली-चीनी गाड॰ियों के कारोबार को रोका जाना चाहिए। लेकिन यह पूरी तरह से गलत है। भले ही नेपाल के वर्तमान शासक चीन के बहकावे में आ रहे हों और नेपाल के जहन में बस रहे हों, फिर भी नेपाल की जनता की हिंदुस्थान पर आस्था बनी हुई है। चीन द्वारा भगवा नेपाल को लाल बनाना उन्हें स्वीकार नहीं। एक दिन नेपाल की जनता ही बगावत करके काठमांडू पर हिंदुत्व का भगवा लहराएगी। हमें उस नेपाली जनता में आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है। नेपाल की जनता को आत्मनिर्भर बनाकर आत्मबल देने की जरूरत है। संघ परिवार के समक्ष यह एक बड़ी चुनौती है! देखते हैं कि नेपाल पर संघ परिवार की क्या भूमिका होती है!