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नोटों पर यूवी लाइट से मारे जा रहे हैं वायरस

हिंदुस्थान में तो अभी कोरोना की शुरुआत है पर चीन के साथ ही यूरोप व पश्चिम एशिया में यह तेजी से पैâल रहा है। इसका एक प्रमुख वाहक नोटों को भी माना जा रहा है। हिंदुस्थान में अभी तक तो इस बारे में कोई खबर नहीं आई है पर यूरोप में इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। ‘डेलीमेल’ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने बैंकों ने नोटों पर वायरस को मारने के लिए तेज यूवी (अल्ट्रावायलेट) लाइट का उपयोग करना शुरू किया और फिर वैâश को दो हफ्ते के लिए बंद कर दिया, जब तक कि उसका उपयोग सुरक्षित नहीं समझा जाता।
बैंक करेंसी सैकड़ों नहीं, हजारों लोगों के हाथों से होकर हम तक पहुंचते हैं। ऐसे में बैंक करेंसी से इस वायरस की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस करेंसी में उसी तरह से रह सकता है जैसे कि यह डोर नॉब्स, हैंडिल और टॉयलेट हैंडल जैसी कठोर सतहों पर रहने में सक्षम है। गत रविवार को जर्मनी में वहां की एक मीटिंग के दौरान एक मंत्री दूसरे अधिकारियों के साथ बैठे थे। तभी जर्मन की चांसलर एंजेला मर्वेâल पहुंचीं। उन्होंने हाथ मिलाना चाहा, लेकिन जीहोफर ने सिर्फ हैलो कहा। फिर सभी हंस पड़े। घटना का वीडियो इंटरनेट पर खूब देखा गया। बताया गया कि कोरोना वायरस के कारण ही चांसलर ने पहले से ही लोगों से हाथ मिलाना बंद कर दिया है। यह बचाव के लिए ठीक है।