नो पेंशन, नो वोट, सरकारी कर्मचारियों के `मन की बात’

नई पेंशन योजना को लेकर नवंबर २००५ के बाद सरकारी सेवा में शामिल हुए कर्मचारियों में रोष है। इसको लेकर किए जा रहे आंदोलन को अनदेखा करनेवाली सरकार को अब इन कर्मचारियों ने घेरना शुरू किया है। कर्मचारियों ने अब नो पेंशन, नो वोट का नारा दिया है।
बता दें कि एक नवंबर २००५ के बाद सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बंद कर नई पेंशन योजना लागू की है। यह नई पेंशन योजना शेयर मार्वेâट पर आधारित है इसलिए कर्मचारियों में उक्त पेंशन योजना को लेकर रोष है। राज्य पुरानी पेंशन अधिकार संगठन के संदीप सोमवंशी ने बताया कि पिछले चार वर्षों से नई पेंशन योजना के विरोध में आंदोलन किया जा रहा है लेकिन सरकार इसे अनदेखा कर रही है। वितेश खांडेकर ने बताया कि अब एक नवंबर २००५ के बाद के सभी कर्मचारियों ने नो पेंशन, नो वोट का नारा दिया है। इस अभियान में कर्मचारियों के साथ उनके परिवार भी उतर आए हैं। परिवारों ने तो घर के बाहर इन घोषवाक्यों का फलक भी लगाया है। साथ ही जो पुरानी पेंशन योजना इन कर्मचारियों को लागू करेगा, उसे ही कर्मचारी और उनका परिवार वोट देगा।