नौलखा हुआ मालाड! मुंबई में ढाका से भी ज्यादा भीड़भाड़

बढ़ती आबादी पूरी दुनिया के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित महानगर हो रहे हैं। गांवों से पलायन हो रहा है। लोग रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर आ रहे हैं। शहरों में बढ़ती आबादी और सीमित इन्प्रâास्ट्रक्चर के कारण व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। आबादी के घनत्व की दृष्टि से देखें तो बांग्लादेश की राजधानी ढाका सबसे घनी है। वहां प्रति किलोमीटर सबसे ज्यादा लोग रहते हैं। दूसरे स्थान पर मुंबई का नंबर है। मुंबई में भी मालाड में सबसे ज्यादा नौ लाख लोग रहते हैं। यानी उपनगर मालाड को आबादी की दृष्टि से नौ लखा कहा जा सकता है। बहरहाल अगर मालाड और ढाका की तुलना की जाए तो कहा जा सकता है कि मुंबई में ढाका से ज्यादा भीड़भाड़ है।
मालाड में रहनेवालों की समझो शामत है। यह शामत भीड़भाड़ के कारण है। दूसरी तरफ डोंगरी में रहनेवालों के लिए राहत की बात है क्योंकि यहां भीड़ कम है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक शहर के पी-उत्तर वॉर्ड में ९,६७,०९४ लोग रहते हैं, जो कि शहर के बाकी इलाकों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। यह वॉर्ड मुख्य रूप से मालाड कवर करता है इसलिए मालाड को मुंबई की ढाका भी कहा जा सकता है।
बता दें कि मनपा के स्वास्थ्य विभाग द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़ों के मुताबिक मुंबई की आबादी १.२७८ करोड़ है जबकि मुंबई का क्षेत्रफल ६०३.४ वर्ग किमी है। मनपा द्वारा प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक शहर के १ किमी के क्षेत्र में औसतन २६,००० लोग रहते हैं, वहीं बांग्लादेश के ढाका में प्रति किमी के क्षेत्र में औसतन ४४,५०० लोग रहते हैं। इसका असर रोजाना लोकल ट्रेनों में बढ़ रही भीड़भाड़ को देखकर पता लगता है। मनपा की इस रिपोर्ट में शहर के सभी वॉर्डों पर भी अध्ययन किया गया है, जिसके बाद मालाड मुंबई का सबसे ज्यादा आबादीवाला क्षेत्र बन गया है। मुंबई का बी वॉर्ड, जहां डोंगरी स्थित है, सबसे कम आबादी बसती है। मालाड में मुंबई के ९,६७,०९४ लोग रहते हैं जबकि डोंगरी में १,३०,७६९ लोग ही रहते हैं। इसके अलावा मालाड के पी-उत्तर वॉर्ड के बाद एल-वॉर्ड आबादी के मामले में दूसरे स्थान पर है। एल वॉर्ड, जो कि मुख्य रूप से कुर्ला कवर करता है, वहां मुंबई के ९,२६,८८३ लोग रहते हैं। इसके अलावा तीसरे स्थान पर के-पूर्व वॉर्ड का नाम आता है, जो कि अंधेरी-पूर्व कवर करता है। इस क्षेत्र में ८,४६,४०२ लोग रहते हैं। मुंबई की लगातार बढ़ रही आबादी से पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है। यही नहीं, बढ़ती आबादी मुंबई शहर में महंगाई की समस्या को भी जन्म दे रही है। मुंबई आनेवाले हर इंसान का ख्वाब होता है कि उसका खुद का एक घर हो, ऐसे में कुछ लोग तो अपना घर बना लेते हैं लेकिन बाकियों को अपना गुजारा झोपड़पट्टियों में करना पड़ता है, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है।