न्याय और प्रतिष्ठा का उदय! तख्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब

पटना शहर में स्थित सिख आस्था से जुड़ा यह एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। यहां सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह का जन्म माता गुजरी के गर्भ से हुआ था। उनका बचपन का नाम गोबिंद राय था। यहां महाराजा रंजीत सिंह द्वारा बनवाया गया गुरुद्वारा है जो स्थापत्य कला की सुंदर कृति है।
पर्यटकीय महत्व
यह स्‍थान सिख धर्मावलंबियों के लिए बहुत पवित्र है। सिखों के लिए हरमंदिर साहिब पांच प्रमुख तख्तों में से एक है। यह स्‍थान दुनियाभर में पैâले सिख धर्मावलंबियों के लिए बहुत पवित्र है। गुरु नानक देव की वाणी से अतिप्रभावित पटना के श्री सलिसराय जौहरी ने अपने महल को धर्मशाला बनवा दिया। भवन के इस हिस्से को मिलाकर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया है। यहां गुरु गोबिंद सिंह से संबंधित अनेक प्रमाणिक वस्‍तुएं रखी हुई हैं। इसकी बनावट गुंबदनुमा है। बालक गोबिंदराय के बचपन का पंगुरा (पालना), लोहे के चार तीर, तलवार, पादुका तथा ‘हुकुमनामा’ गुरुद्वारे में सुरक्षित हैं। प्रकाशोत्‍सव के अवसर पर पर्यटकों की यहां भारी भीड़ उमड़ती है।
इतिहास
यह स्थान सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के जन्म स्थान तथा गुरु नानक देव के साथ ही गुरु तेग बहादुर सिंह की पवित्र यात्राओं से जुड़ा है। आनंदपुर जाने से पूर्व गुरु गोबिंद सिंह के प्रारंभिक वर्ष यहीं व्यतीत हुए। यह गुरुद्वारा सिखों के पांच पवित्र तख्त में से एक है। हिंदुस्थान और पाकिस्तान में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे की तरह, इस गुरुद्वारा को महाराजा रणजीत सिंह द्वारा बनाया गया था।
गुरुद्वारा श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब बिहार के पटना शहर में स्थित है। श्री गुरु तेग बहादुर सिंह साहिब जी यहां बंगाल व असम की यात्रा के मौके पर आए। गुरू साहिब यहां सासाराम और गया होते हुए आए। गुरु साहिब के साथ माता गुजरी जी और मामा किरपाल दास जी भी थे। अपने परिवार को यहां छोड़कर गुरु साहिब आगे चले गए। यह जगह श्री सलिसराय जौहरी का घर था। श्री सलिसराय जौहरी श्री गुरु नानक देव जी का भक्त था। श्री गुरु नानक देव जी भी यहां सलिसराय जौहरी के घर आए थे। जब गुरु साहिब यहां पहुंचे तो जो डेउहरी लांघ कर अंदर आए वो अब तक मौजूद है। श्री गुरु तेग बहादुर सिंह साहिब जी के असम यात्रा पर चले जाने के बाद बाल गोबिंद राय जी का जन्म माता गुजरी जी की कोख से हुआ। जब गुरु साहिब को यह खबर मिली तब गुरु साहिब असम में थे। बाल गोबिंद राय जी यहां ६ साल की आयु तक रहे। बहुत संगत बाल गोबिंद राय जी के दर्शन के लिए यहां आती थी। माता गुजरी जी का कुआं आज भी यहां मौजूद है। तख्त श्री पटना साहिब का आंतरिक क्षेत्र, जहां गुरु गोविंद सिंह जी १६६६ में पैदा हुए थे।
गोविंद सिंह को सैन्य जीवन के प्रति लगाव अपने दादा गुरु हरगोविंद सिंह से मिला था और उन्हें महान बौद्धिक संपदा भी उत्तराधिकार में मिली थी। वह बहुभाषाविद् थे, जिन्हें फारसी, अरबी, संस्कृत और अपनी मातृभाषा पंजाबी का ज्ञान था। उन्होंने सिक्ख कानून को सूत्रबद्ध किया, काव्य रचना की और सिक्ख ग्रंथ ‘दसम ग्रंथ’ (दसवां खंड) लिखकर प्रसिद्धि पाई।