न्याय के लिए कतार , में २० हजार मासूम,  एक जज पर ५५५ केस का भार

मासूमों के साथ होनेवाले अत्याचार को रोकने के लिए प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन प्रâम सेक्सुअल आफेंसेस एक्ट बनाया गया और विशेष अदालत भी। कानून और अदालत तो है लेकिन इसके बावजूद मासूमों पर होनेवाला अत्याचार कम नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं कम कोर्ट होने के कारण केवल महाराष्ट्र में ही १९,९६८ मासूम पीड़ित न्याय के लिए कतार में खड़े हैं। आलम यह है कि एक जज के ऊपर ५५५ पोक्सो से संबंधित मामलों का बोझ है। मुंबई के वकीलों की मानें तो यह एक गंभीर समस्या है और इसके निपटारे के लिए अधिक कोर्ट, महिला जज और पीड़ितों के लिए बेहतर माहौल की जरूरत है।
बता दें कि मुख्य न्यायाधीश गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने देश में बच्चों से दुष्कर्म के बढ़ते मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री और अदालत की ओर से नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी ने इससे संबंधित रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की। रिपोर्ट के अनुसार देश में पोक्सो के लिए कुल ६७० कोर्ट हैं, जिनमें १.५ लाख मामले प्रलंबित हैं। सबसे अधिक ४४,३७६ मामले उत्तर प्रदेश में और उसके बाद १९,९६८ मामले महाराष्ट्र के कोर्ट में प्रलंबित हैं। राज्य बाल कल्याण समिति की सदस्य और मुंबई हाईकोर्ट की एडवोकेट प्रियंका पाटील ने कहा कि विशेष कोर्ट, जजों की संख्या काफी कम हैं, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। इसी के साथ महिला जजों की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि मासूम को अपनी आपबीती बताने के लिए कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। कई बार देखा गया है कि मासूम परिवार के दबाव में आकर बयान बदल देते हैं। इसी के साथ कोर्ट में एक ऐसा माहौल होना चाहिए ताकि पीड़ित को असहज महसूस न हो। गौरतलब है कि आज भी लोगों में पोक्सो कानून को लेकर जानकारी नहीं है। कोर्ट और जज बढ़ाने के साथ-साथ उक्त कानून को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भी मुहिम चलानी चाहिए। इससे नए मामलों में कमी आएगी और कोर्ट पर से भी मामलों का बोझ कम होगा। कालीना स्थित फॉरेंसिक लैब के निदेशक डॉ. केवी कुलकर्णी ने बताया कि महाराष्ट्र देश का एकमात्र राज्य है, जिसके पास ६ डीएनए टेस्ट लैब खाली हैं। इस जांच के लिए हमें २ महीनों का समय लगता है बाकी मामले से जुड़े मामलों में १ महीने के भीतर ही सारी रिपोर्ट दे दी जाती हैं। विशेष कोर्ट और जज की कमी के चलते मामलों का जल्द से जल्द निपटारा नहीं हो पा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इस पर हैरानी जताते हुए पीठ में शामिल न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस ने केंद्र सरकार को ऐसे जिलों में जहां १०० से ज्यादा ऐसे मामले लंबित हैं, वहां एक पॉक्सो अदालत का गठन किया जाए। पीठ ने इसके लिए केंद्र को दो महीने का समय दिया है।