पंचम भाव में केतु बनाता है कंफ्यूजन

गुरु जी मेरी राशि क्या है, कुंडली में दोष क्या है अ‍ैर विकास के लिए कोई उपाय बताएं?
-सुरेश पवार
(जन्म- १९ नवंबर १९९५, समय दिन में १०.१५ बजे, अंधेरी-मुंबई)
सुरेश जी आपका जन्म धनु लग्न एवं वृष राशि में हुआ है, लग्नेश बृहस्पति भाग्येश सूर्य के साथ बैठकर अस्त होकर समय-समय पर आपके आत्मबल को समाप्त कर देता है। आपकी कुंडली में पंचमेश मंगल नीच राशि का होकर अष्टम भाव में बैठकर आपको शिक्षा का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होने दे रहा है क्योंकि पंचम भाव में केतु बैठकर समय-समय पर आपको कंफ्यूजन में भी डाल देता है। अष्टम स्थान में मंगल बैठने के कारण आपकी कुंडली मांगलिक भी है तथा आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी है। इन योगों की पूजा कराना आपके लिए आवश्यक है और विवाह का निर्धारण होने से पहले ‘अर्क विवाह’ जरूर कराएं, ऐसा करने पर अनुकूल पत्नी प्राप्त होने में मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
विवाह कब तक होगा, कोई उपाय बताइए?
-भावना जायसवाल
(जन्म- २८ दिसंबर १९९३, समय दिन में ११.१५ बजे, मुंबई)
भावना जी आपका जन्म कुंभ लग्न एवं मिथुन राशि में हुआ है। लग्नेश शनि लग्न में ही बैठकर आपके आत्मबल को बहुत ही बढ़ाया है। आपकी कुंडली का अच्छी प्रकार से अवलोकन किया गया। पराक्रमेश एवं कर्मेश मंगल सुखेश एवं भाग्येश शुक्र तथा पंचमेश बुध ये तीनों ग्रह आपकी कुंडली में अस्त होकर उक्त स्थानों को कमजोर बना दिया है। विवाह का समय चल रहा है। ४३ दिन तक पीपल के पेड़ की परिक्रमा करें, परिक्रमा करते समय ‘ओम् पीपलाश्रय संस्थिताय नम:’ मंत्र का जप जरूर करना चाहिए। अनुकूल पति प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
मेरे विवाह में विलंब क्यों हो रहा है, कारण एवं निवारण बताएं?
-राहुल
(जन्म-३ नवंबर १९८७, समय रात्रि ४ बजे, जोगेश्वरी-मुंबई)
राहुल जी आपका जन्म सिंह लग्न एवं मीन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। आपकी कुंडली लग्न मांगलिक नहीं है लेकिन चौथे स्थान पर शनि एवं अष्टम स्थान पर राहु बृहस्पति के साथ बैठने से चांडाल योग बन रहा है, विवाह के कारक ग्रह शुक्र एवं बृहस्पति होते हैं पर ये दोनों ग्रह आपकी कुंडली में कमजोर हैं। इन दोनों ग्रहों को ताकत देने के लिए वैदिक विधि से ग्रह शांति एवं ‘चांडाल योग’ की पूजा कराना आवश्यक है। चांडाल योग की पूजा करने के बाद में अनुकूल पत्नी प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होने के साथ ही विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। विवाह का समय चल रहा है।
गुरु जी मेरी शादी कब होगी, यदि कोई दोष है तो उपाय सुझाएं?
-शांति गुप्ता
(जन्म- १३ जनवरी १९९५, समय ६.३० बजे, नेहरू नगर-मुंबई)
शांति जी आपका जन्म धनु लग्न एवं वृष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का विचार अच्छे ढंग से किया गया। नवग्रहों में चंद्र ग्रह मन का कारक माना जाता है। आपकी कुंडली में चंद्रमा अष्टमेश होकर छठे भाव में उच्च राशि का होकर बैठा है, जो आपके मन को चंचल बनाया है और लग्नेश बृहस्पति भी द्वादश भाव में बैठकर आपके आत्मबल को कमजोर बना देता है। पंचम भाव में केतु एवं लाभ भाव पर राहु बैठकर आपको जीवन साथी की तलाश करने में भ्रमित कर रहा है क्योंकि आपकी कुंडली में इस समय राहु की महादशा में केतु का अंतर चल रहा है। आप कालसर्प योग की शांति कराएं। विवाह का समय चल रहा है और २०२० तक अनुकूल पति प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा।
गुरु जी मेरी राशि क्या है और कुंडली में दोष क्या है? -शिल्पा गुप्ता
(जन्म- ८ मई १९९४, समय ७.३० बजे, मानखुर्द-मुंबई)
शिल्पा जी आपका जन्म तुला लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। आपकी कुंडली में पंचम स्थान पर शनि बैठकर आपकी शिक्षा को अनुकूल बनाया है लेकिन द्वितीय भाव में राहु बैठकर कभी-कभी आपको भ्रमित भी कर देता है। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है लेकिन सप्तम स्थान में सूर्य बैठकर दांपत्य जीवन को कमजोर बना दिया है क्योंकि आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बन रहा है।