पक्षी विहार से प्लास्टिक पार : वन विभाग सफल

 महाराष्ट्र का पहला विहार
 १२.११ वर्ग किमी है क्षेत्रफल
 १४७ प्रजातियों के पक्षी दिखते हैं

रायगढ़ जिले में कर्नाला पक्षी विहार पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त करने में वन विभाग सफल हुआ है। मुंबई-गोवा राजमार्ग पर पनवेल से १२ किमी दूर है। कर्नाला किला और आसपास का क्षेत्र पक्षी विविधता में समृद्ध होने से १२.११ वर्ग किमी के क्षेत्र को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। चूंकि यह स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का घर है इसलिए यह दिन-रात पक्षियों से भरा हुआ लगता है। यह पक्षियों के लिए घोषित महाराष्ट्र का पहला विहार है। यहां हम १४७ प्रजातियों के पक्षी देख सकते हैं, जिनमें से ३७ प्रजातियां प्रवासी पक्षियों की हैं। इस विहार में ६४२ अलग-अलग प्रकार के पेड़, जंगली जड़ी-बूटी और विभिन्न जड़ी-बूटियां हैं। बड़े पेड़ोंवाली झाड़ियां यहां प्रचुर मात्रा में हैं।
हजारों पर्यटक प्रतिदिन और छुट्टियों में पक्षी विहार आते हैं। विहार में वे भोजन, पानी ले जाते हैं और विहार में ले जाया जा रहा प्लास्टिक वन्यजीवों के अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसके उपाय के लिए, वन्यजीव, ठाणे के उप-संरक्षक के मार्गदर्शन में वन क्षेत्र अधिकारियों, कर्नाला और वन कर्मचारियों ने विहार के आसपास में बसे ग्राम समितियों के लोगों की एक बैठक बुलाई। उनके साथ चर्चा करने के बाद, विहार में जानेवाले पर्यटकों की सामग्रियों की जांच की गई और उनके द्वारा रखे गए प्लास्टिक को रिकॉर्ड किया जाने लगा। प्लास्टिक के सामान के बदले में, उनसे शुरू में २०० रुपए जमा कराया जाने लगा। जब वे विहार से लौटे तो उनके द्वारा वापस लाई गई सभी प्लास्टिक की वस्तुओं के बदले जमा किए गए २०० रुपए वापस किए जाने लगे।