पतंजलि को लगेगी पेनाल्टी

ईमानदारी का दंभ भरनेवाले बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि खुद जांच के घेरे में आ गई है। दरअसल जीएसटी में हुई कटौती के बाद उसका जो लाभ ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए था, वह उन तक नहीं पहुंचाया गया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ एंटी-प्रोफेटिरिंग अथॉरिटी (डीजीएपी) के सूत्रों की मानें तो जीएसटी में कट करके लगभग १५० करोड़ रुपए का मुनाफा पतंजलि ने कमाया है। इस मामले में पतंजलि को भारी पेनाल्टी भरनी पड़ सकती है।
बता दें कि गत वर्ष नवंबर और जनवरी में केंद्र सरकार ने कई प्रोडक्ट्स पर लागू की गई जीएसटी की दरों में कटौती की थी। जीएसटी में हुई दोहरी कटौती यानी ग्राहकों को कुछ पैसों का लाभ मिलना चाहिए था। देश में फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड बेचने के मामले में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि तीसरे स्थान पर है। पतंजलि साबुन से लेकर शहद तक बेचती है और देश में लाखों लोगों की पसंद पतंजलि है। बड़े ही भरोसे के साथ लोग प्रोडक्ट्स खरीदते हैं लेकिन उन्हें क्या पता था कि कर में जो सरकार ने राहत दी है, वो उन तक नहीं पहुंच रही है। एक ग्राहक ने जब मुद्दे को नेशनल एंटी-प्रोफेटिरिंग अथॉरिटी (एनएए) के नेशनल-लेवल स्टैंडिंग कमिटी के समक्ष रखा, उसके बाद डीजीएपी को जांच के आदेश दिए गए। जांच में १०० से भी अधिक प्रोडक्ट्स पर कर की छूट दी गई थी लेकिन वह ग्राहकों तक नहीं पहुंचाई गई। एनएए ने पतंजलि के वित्तीय अधिकारी को समन भी भेजा लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अगले माह से एनएए मामले की सुनवाई शुरू करेगी। पतंजलि पर लगे आरोप सिद्ध होते हैं तो कंपनी को सामानों के दाम में तुरंत कटौती करनी पड़ेगी और ग्राहकों के हक का कमाया पैसा उन्हें लौटाना होगा। इतना ही नहीं कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।