पनवेल एयरपोर्ट से हुआ, वोटिंग का टेकऑफ!, १० गांवों को बूथ लैंडिंग का इंतजार

लोकसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे मतदातों में भी अपने मत के अधिकारों को लेकर हलचल तेज हो गई है। पनवेल में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण का कार्य काफी तेजी से चल रहा है। पनवेल में बन रहे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित लोगों में इन दिनों अपने मत के अधिकारों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। इस परियोजना से प्रभावित हजारों लोग स्थानांतरित हो गए हैं, ऐसे में यहां रह रहे मतदाताओं के वोटिंग का भी टेकऑफ हो गया है। परियोजना प्रभावित लोगों का कहना है कि अब तक चुनाव अधिकारियों ने उनसे कोई संपर्क नहीं किया है और अब तक यह भी नहीं पता चल पा रहा है कि वे मतदान कहां जाकर करेंगे? इस प्रकल्प से प्रभावित लगभग १० गांवों को अभी भी बूथ लैंडिंग का इंतजार है, ताकि २९ अप्रैल को चौथे चरण में होनेवाले मतदान में वे वोटिंग कर सकें।
पनवेल में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का काम काफी तेजी से हो रहा है। सिडको ने लक्ष्य रखा है कि दिसंबर २०१९ में पनवेल एयरपोर्ट की पहली हवाई पट्टी शुरू हो जाएगी। एयरपोर्ट परियोजना से प्रभावित लगभग ९५ प्रतिशत गांववालों का स्थानांतरण भी हो चुका है। परियोजना से प्रभावित लोगों का स्थानांतरण चिंचपाड़ा, डूंगी, वरचे, ओवले, कोंबडभुजे, गणेशपूरी, वघिवड़ी पाड़ा, उल्वे, तारघर, कोल्ही और कोपर किया गया हैं। ऐसे में १० गांवों के लगभग ९५ प्रतिशत घर तोड़ दिए गए हैं और यहां पर रह रहे हजारों परिवारों को पनवेल, वडघर, करंजोडे, उल्वे वसाहत सहित अन्य भागों में बसाया गया है। परियोजना प्रभावित अविनाश पाटील का कहना है कि हमारा सवाल यह है कि पुरानी वोटिंग लिस्ट या फिर नई वोटिंग लिस्ट में हमारा नाम आएगा। हमें अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में गांव के हजारों लोग असमंजस में हैं। चुनाव को लेकर अब तक कोई गाइडलाइन नहीं जारी की गई है। पहले जिला परिषद और ग्राम पंचायत की इमारतों में मतदान होते थे, ऐसे में किसी को मतदान के लिए जागरूकता या फिर मार्गदर्शन की जरूरत नहीं पड़ती थी। पनवेल एयरपोर्ट के निर्माण कार्य के चलते यहां के स्कूल जमींदोज हो चुके हैं तो अब हम मतदान कहां करेंगे? यह प्रश्न हर किसी के अंदर उठ रहा है। जिला चुनाव अधिकारी व रायगढ़ के कलेक्टर विजय नामदेव सूर्यवंशी का कहना है कि बूथ लेवल अधिकारी जल्द ही गांववालों से संपर्क करेंगे। परियोजना से प्रभावित गांववालों का अधिकारी मार्गदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ी तो मतदान के लिए विशेष सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी, ताकि सभी लोग मतदान कर सकें।