पब्जी बनाम पापाजी, सरकार नहीं मानी तो पब्लिक करेगी पिटीशन

– अब तक सरकार से कोई रिस्पांस नहीं
– पब्जी के खिलाफ फ़ाइल होगा पीआईएल

इन दिनों प्रधानमंत्री से लेकर देश की पब्लिक के बीच कोई चर्चा आम है तो वो है पब्जी गेम की। पब्जी (प्लेयर्स अननोन बैटल ग्राउंड) नामक इस मारधाड़ और लूटमार वाले गेम ने बच्चों, युवाओं और वयस्कों को इस कदर अपनी ओर आकर्षित किया है कि अब लोगों को इसकी लत लग गई हैं। ऐसा ही कुछ ११ वर्षीय अहद के साथ हो रहा था। पब्जी खेलने की बढ़ती चाह को समय रहते उसके अभिभावकों ने भांप लिया। अपने बच्चों के साथ-साथ दूसरे बच्चों का भविष्य बचाने के लिए अहद के पापाजी ने पब्जी गेम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अहद द्वारा उसके अभिभावकों की मदद से केंद्र व राज्य सरकार, मुंबई पुलिस, पब्जी गेम निर्माता को पत्र लिखकर इस गेम पर पाबंदी लगाने की मांग की है। यदि सरकार इस पर कोई निर्णय नहीं लेती है तो कोर्ट में पब्लिक पिटीशन दायर करेगी। यानी कोर्ट में पब्जी बनाम पापाजी का मामला चलेगा।

पब्जी की लत से परेशान अभिभावक, शिक्षक, डॉक्टर यहां तक कि कुछ युवकों के बीच यह चर्चा हो रही है कि इस गेम का कुछ करना पड़ेगा। बांद्रा के रहनेवाले अहद निजाम भी मोबाइल पर पब्जी गेम खेलने का आदी हो गया था। जब उसके माता-पिता ने उसे समझाया तो उसने कहा कि मेरे सारे दोस्त गेम खेलते हैं और मुझसे कोई बात नहीं करता तो मैं कैसे छोड़ दूं! यह सुनते ही उसके पिता एड. तनवीर निजाम ने समझ लिया कि यह गेम किस तरह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
बता दें कि काफी समझाने के बाद असद को अभिभावकों की बात समझ में आई। उसने २५ जनवरी को अपनी मां एड. मरियम निजाम की मदद से एक पत्र लिख केंद्र व राज्य सरकार से अनुरोध किया कि ‘पब्जी गेम हिंसा, मारधाड़, लूटमारी पर आधारित है। गेम को जीतने के लिए दूसरों को मारना ही पड़ता है। यदि बच्चे यह गेम खेलेंगे तो उनमें भी इसी प्रकार की प्रवृत्ति जागेगी। इसलिए मेरा आप से यह अनुरोध है कि गेम को बैन किया जाए। यदि सरकार कोई उचित कदम नहीं उठाती है तो फिर मैं कोर्ट में याचिका दायर करूंगा।’ सायन अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेश चिरवटकर ने कहा कि इस गेम में दूसरों को मार कर अपने अंक बढ़ाने की ललक बढ़ती ही चली जाती है। यह एक प्रकार का नशा है। सरकार को इस पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाना चाहिए। इसी के साथ अभिभावकों को भी इस बात का ध्यान देना चाहिए कि बच्चों को जितनी जरूरत हो उतनी ही छूट दी जाए, महंगे फोन और इंटरनेट की उपलब्धता बच्चों को बिगाड़ देती है। छात्र अहद के पिता एड. तनवीर निजाम कहते हैं कि अगर सरकार ने इस पर पाबंदी लगाने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया तो गुरुवार को वे पीआईएल (जनहित याचिका) दायर करेंगे। इस गेम के कारण स्कूली बच्चों में हिंसा का संदेश जाता है। यदि बचपन से बच्चे को अच्छी सीख मिले तब वह काबिल बनता है। ये गेम तो गलत चीजें सिखा रहा है। कई राज्यों ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया है।

अभिभावक परेशान
दहिसर निवासी नीलम सिंह ने कहा कि पता नहीं यह वैâसा गेम है, दिन-रात उनका लड़का मोबाइल में ही घुसा रहता है। कोई भी काम बोलो तो अनसुना कर देता है। कई अभिभावक इस पब्जी से परेशान हैं। सरकार इस पर पाबंदी क्यों नहीं लगाती? टिटवाला के रामसूरत तिवारी ने बताया कि उनका बेटा रात भर गेम में व्यस्त रहता है, फोन पर गालीगलौज करना, चिल्लाना चालू रहता है। कई बार तो मैंने फोन उठाकर फेंक दिया लेकिन वह फिर से उसी में घुस जाता है। सरकार को कुछ करना चाहिए।

पढ़ाई और काम पर पड़ रहा है असर
शहर के डॉक्टरों के अनुसार यह किसी व्यसन से कम नहीं है क्योंकि बच्चे यह गेम खेलने के लिए अपने माता-पिता तक से लड़ जाते हैं। युवाओं में भी इस गेम का इतना क्रेज है कि वे कॉलेज व ऑफिस में भी अपना सीमित समय गेम खेलने के पीछे व्यर्थ कर देते हैं। इसी के साथ शारीरिक समस्या जैसे आंखों से पानी गिरना, चश्मा, काफी देर तक एक ही पोजिशन में रहने से रीढ़ की हड्डी में दर्द होना और काम या पढ़ाई पर फोकस न कर पाने जैसी समस्या भी आम है।
हीरानंदानी अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश शेट्टी कहते हैं कि बच्चे यह गेम न खेलें, इसे लेकर सरकार को निरंतर जागरूकता मुहिम चलाने की जरूरत है। यदि बच्चों के एक्सेस पर प्रतिबंध लगाया जा सके तो बेहतर होगा।
महाराष्ट्र जूनियर कॉलेज महासंघ के अध्यक्ष अनिल देशमुख बताते हैं कि बच्चों की पहुंच से यह गेम दूर रखने का कोई उपाय है तो सरकार को जरूर करना चाहिए। इसी के साथ अभिभावकों को भी अपने बच्चे की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है।

पाबंदी के लिए इन्हें भेजा पत्र

– केंद्रीय आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद
– महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस
– शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े
– मुंबई पुलिस आयुक्त सुबोध जैसवाल
– मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ इंडिया
– माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन इंडिया
– पब्जी के सीईओ