परिवार में टंटा कराएगा नया कानून, मामला किराए की कोख का

नि:संतान दंपतियों के लिए वरदान सिद्ध हुई आईवीएफ सरोगेसी तकनीक (किराए की कोख) वरदान सिद्ध हुई है। अपनी संतान प्राकृतिक रूप से या किसी हादसे के कारण पत्नी के मां बनने में असमर्थ हजारों दंपति आज इस आधुनिक तकनीक से संतान सुख का उपभोग कर रहे हैं लेकिन कुछ अमीर लोगों द्वारा इस तकनीक का गलत इस्तेमाल किए जाने तथा गरीब महिलाओं के शोषण के मामले सामने आने के बाद अब सरोगेसी से संबंधित नियमों को सख्त करने की कवायद शुरू हो गई है। इससे संबंधित बिल संसद में पारित हो चुका है। किराए की कोख के मामले में गरीब महिलाओं के शोषण तथा सरोगेसी तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए नियम जरूरी हैं लेकिन वास्तव में संतान सुख हासिल करने योग्य दंपतियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इससे परिवारों में तनाव यानी टंटा बढ़ सकता है तथा परिवार टूट सकते हैं।
बता दें कि कुछ अमीर महिलाएं फिगर के फेर में किराए की कोख के जरिए संतान को जन्म देती हैं। इसी तरह लीव इन रिलेशन में रहनेवाले जोड़े तथा कई अविवाहित पुरुष भी सरोगेसी तकनीक से माता-पिता बन चुके हैं। कुछ डॉक्टर और दलालों का गिरोह संतान को जन्म देने में सक्षम गरीब महिलाओं को पैसों का लालच देकर अमीरों के बच्चों को जनम देने के लिए तैयार करते थे। इससे संबंधित करारनामा तो तैयार होता था लेकिन अपनी कोख किराए पर देनेवाली महिलाओं के साथ बाद में धोखाधड़ी की जाती थी। ऐसे लगभग दर्जन भर मामले पिछले दिनों नागपुर के नंदनवन पुलिस थाने की हद में सामने आए थे। उस मामले में पुलिस ने ४ डॉक्टरों सहित एक दलाल को गिरफ्तार भी किया था, जबकि मुंबई में भी ऐसी घटनाएं घटती रहती है। इस तरह के मामले सामने आने के बाद अब सरकार ने नया सरोगेसी बिल संसद में पारित किया है। जिसके अनुसार व्यावसायिक सरोगेसी पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा लिव इन दंपति या अविवाहित पुरुष तथा विदेशी नागरिक अब हिंदुस्थान में कोख किराए पर नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा कोई रिश्तेदार महिला ही अपनी कोख किराए पर दे सकेगी। इस बारे में मालाड-पश्चिम स्थित आरुष आईवीएफ एंड एंडोस्कोपी सेंटर के डॉ. मुकेश अग्रवाल ने नए नियमों का स्वागत करते हुए बताया कि अनुमानत: २०० आईवीएफ सेंटर मुंबई में होंगे, जिनमें हर महीने औसतन २०० बच्चों का जन्म सरोगेसी तकनीक के जरिए होता होगा। अब तक आईवीएफ सेंटर सीधे सरोगेसी के जरिए प्रसूति करवाते थे। अब राज्य तथा केंद्र द्वारा गठित कमिटी सरोगेसी से संबंधित मामलों पर नजर रखेगी। नए नियमों के कारण ऐसे नि:संतान दंपति संतान सुख से वंचित रह जाएंगे, जिनकी कोई करीबी रिश्तेदार महिला अपनी कोख किराए पर देने को तैयार नहीं होगी। इसके अलावा पत्नी में दोष होने पर पति पत्नी पर बहन, भाभी या अन्य किसी करीबी रिश्तेदार को कोख किराए पर देने के लिए दबाव बना सकते हैं। यदि पत्नी अपने किसी रिश्तेदार को मनाने में नाकाम होती है तो उसे प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है, इससे परिवार भी टूट सकते हैं।