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पर्यटन उद्योग को रु ४०० करोड़ का फटका!

देशभर में  फैले कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव से सबसे ज्यादा फटका पर्यटन उद्योग को लगा है। हिंदुस्थान के बाहर और देश के अंतर्गत कई टूर्स आयोजन को रद्द करना पड़ा है। इससे टूर्स कंपनियों को करीब ४०० करोड़ रुपए का फटका लगा है। टूर्स कंपनियों द्वारा ये नुकसान भरपाई अपने कर्मचारियों से वसूलने का मन बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कई टूर्स कंपनियां नुकसान की एवज में कर्मचारियों के वेतन में ३० प्रतिशत कटौती कर रही हैं।
विश्वभर में कोरोना वायरस का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। राज्य में गुरुवार तक कोरोना के ४९ मरीज पाए गए हैं, जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या ८०० के पार पहुंच गई है। इस वायरस का प्रभाव विदेशों से हिंदुस्थान आनेवाले लोगों में अधिक पाए जाने पर एहतियात के रूप में देश और देश के बाहर आयोजित किए गए सभी टूर्स के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। इसका सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ा है। कुछ टूर्स कंपनियों ने जहां टूर्स रद्द कर दिए हैं वहीं कुछ लोगों ने टूर्स की तिथि बढ़ा दी है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इसे सबसे बुरे संकटों में से एक करार दिया है। पर्यटन उद्योग से जुड़े होटल, ट्रैवेल एजेंट, पर्यटन सेवा कंपनियों, रेस्तरां, पारिवारिक मनोरंजन पार्क, विरासत स्थल, क्रूज, कॉर्पोरेट पर्यटन और साहसिक पर्यटन इत्यादि उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। बताया जाता है कि मुंबई की सभी टूर्स कंपनियों ने होनेवाली नुकसान भरपाई को अपने कर्मचारियों से वसूलने की तैयारी की है। कर्मचारियों के वेतन में से करीब ३० से ४० प्रतिशत कटौती करने की तैयारी कंपनियों ने की है।
समिति का आकलन
सीआईआई की पर्यटन समित ने कोरोना वायरस महामारी के पर्यटन उद्योग पर असर का आकलन किया है। इसके मुताबिक अक्टूबर से मार्च के बीच हिंदुस्थान आनेवाले विदेशी पर्यटकों की संख्या वार्षिक आगमन की संख्या ६० फीसदी होती है।
विदेशी पर्यटकों से
२८ अरब डॉलर की आय
हिंदुस्थान को विदेशी पर्यटकों से २८ अरब डॉलर से अधिक की आय होती है। कोरोना वायरस के प्रचार से यात्रा टिकटों, होटल बुकिंगों इत्यादि का वैंâसिलेशन शुरू हुआ। अब मार्च में कई हिंदुस्थानी पर्यटन स्थलों पर बुकिंग वैंâसिलेशन ८० फीसदी के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।