" /> पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हो विकास -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हो विकास -मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

पश्चिम घाट पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र बाबत केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ चर्चा
विकास की बात हमेशा की जाती है, लेकिन पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास होना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट के 2,092 गांवों के क्षेत्र को पश्चिमी घाटों के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र की अंतिम अधिसूचना में शामिल करने का भी अनुरोध किया।
कल केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा इस क्षेत्र के प्रारूप की अधिसूचना के संदर्भ में चर्चा की। इस मौके पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, गुजरात, तामिलनाडु और केरल सचिव ने अपनी-अपनी भूमिका रखी। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो, महाराष्ट्र के वन मंत्री संजय राठोड, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुरेशचंद्र गैरोला, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनु कुमार श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री सचिवालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष कुमार सिंह, प्रधान सचिव विकास खारगे आदि इस चर्चा में सहभागी हुए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारी भूमिका विकास करते समय पर्यावरण को प्राथमिकता देना है और महाराष्ट्र की भूमिका पश्चिमी घाटों के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अखंडता बनाए रखना है।
एक बार पश्चिमी घाटों को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर दिए जाने के बाद, इस क्षेत्र में कुछ काम जल विद्युत परियोजनाओं, कुछ उद्योगों या खनन, थर्मल पावर, बड़े निर्माणों जैसे काम प्रतिबंधित रहेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि इस संबंध में कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सभी प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि कोरोना के बाद सभी संबंधित राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।