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पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के प्रयास को मिली सफलता

पर्यावरण विभाग के नए नाम पर कैबिनेट की मुहर!

-नया नाम पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग

पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के प्रयास को आखिरकार सफलता मिल गई है। राज्य कैबिनेट ने कल पर्यावरण विभाग का नाम ‘पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन’ विभाग करने पर मुहर लगा दी है। पर्यावरण विभाग में वातावरण परिवर्तन के काम के लिए ‘स्टेट नॉलेज मैनेजमेंट सेंटर ऑन क्लायमेट चेंज’ कक्ष मदद करता है। यह विषय पर्यावरण विभाग का अभिजात्य घटक है, जो जलवायु परिवर्तन से संबंधित कार्य करने में पर्यावरण विभाग की सहायता करता है।
काम का दायरा बढ़ता रहेगा और जनता में जागरूकता भी बढ़ रही है। महाराष्ट्र सरकार ने 2011 में जलवायु परिवर्तन पर एक कार्य योजना रिपोर्ट भी तैयार की है और इसे 2014 में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया था।
गौरतलब हो कि विश्व पर्यावरण दिवस के दिन आदित्य ठाकरे ने कहा था कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग प्रकृति के पांच तत्वों – पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि और आकाश पर काम करेगा। विभाग पृथ्वी से संबंधित वानिकी, ठोस घनकचरा प्रबंधन, गन्दा पानी का शुद्धिकरण और भूमि क्षरण पर काम करेगा। साथ ही, वायु गुणवत्ता के लिए, यह विभाग उद्योग, परिवहन और अन्य विभागों के सहयोग से वायु प्रदूषण को कम करके महाराष्ट्र में वायु गुणवत्ता में सुधार व वायु गुणवत्ता की रक्षा करेगा। इसमें जल संसाधनों से संबंधित नदी संरक्षण के चल रहे कार्य को भी शामिल किया गया है, जिसमें समुद्री जैव विविधता, जल संसाधनों के संरक्षण और साथ-साथ तटीय क्षेत्रों की सफाई भी शामिल है। ऊर्जा के कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करने, ऊर्जा की बचत के साथ-साथ अन्य विभागों के साथ काम करने से ऊर्जा की बर्बादी से बचें। गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के लिए अभिनव पहल राजमार्गों, खेत बांधों के दोनों किनारों के जमीन पर लागू की जाएगी। आकाश की विभिन्न अवधारणाओं के बीच, यह खंड स्थान और प्रकाश के रूप में आकाश के सिद्धांत को परिभाषित करेगा और मानव प्रकृति में परिवर्तन के लिए जागरूकता और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को अपने भविष्य को समृद्ध करने के लिए प्रेरित करेगा। जीवन के पांच तरीके को अपनाए बिना हम प्रकृति के साथ नहीं रह पाएंगे और जैव विविधता का अस्तित्व नहीं रहेगा। इसके अलावा एमएसइडीसीएल और एमएसीबी तैयार कंपनियों के माध्यम से धन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार ने एनटीपीसी, पीएफसी इन राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ विभिन्न समझौतों की गारंटी देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार द्वारा अधिकतम 20,000 करोड़ रुपये की गारंटी दी जाएगी। राज्य में सभी उद्योग और वाणिज्यिक उद्यम कोरोना की स्थिति और लॉकडाउन के कारण बंद हैं।

बिजली की मांग घटी
चूंकि आम जनता भी घर पर है, इसलिए घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा बिजली की अधिक खपत के कारण औद्योगिक उपभोक्ताओं से बिजली की मांग कम हो गई है। महाराष्ट्र में बिजली की औसत दैनिक मांग 23,000 मेगावाट से घटकर 16,000 मेगावाट हो गई है। उम्मीद है कि लॉकडाउन के बाद, औद्योगिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और ठीक होने में कम से कम एक साल लगेगा। यदि मध्यम अवधि के ऋण राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से लिए जाते हैं, तो सरकार को गारंटी की आवश्यकता होगी। इस गारंटी के लिए सरकार द्वारा निर्धारित गारंटी शुल्क माफ करने का भी निर्णय कल कैबिनेट की बैठक लिया गया।