" /> पवार जाग ही रहे हैं!, विरोधियों के पेट में तूफान!!

पवार जाग ही रहे हैं!, विरोधियों के पेट में तूफान!!

यह सही है कि कोरोना से पूरा देश प्रभावित हुआ है, लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा के नेता कोरोना और प्रकृति के तूफान जैसे बेकाबू संकट के बावजूद बेहद राजनीतिग्रस्त हो गए हैं। इस पर जितनी दया दिखाई जाए, कम है। निसर्ग तूफान की चपेट में आई कोंकणी जनता को सांत्वना देने के लिए श्री शरद पवार दो दिवसीय दौरे पर गए थे। मुख्यमंत्री ठाकरे ने भी रायगड का जायजा लिया। वे फिर से वहां जाएंगे, ऐसी संभावना है। निसर्ग तूफान से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र अलीबाग, रेवदंडा, चौल, नागाव, श्रीवर्धन, मंडणगढ़, दापोली और दिवेआगर थे। सरकार ने पंचनामा के पहले ही आपातकालीन सहायता की घोषणा की। अब श्री शरद पवार अपने तरीके से लोगों को हुए नुकसान और राहत कार्य के बारे में जानने के लिए वहां पहुंचे। इस पर भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल अपने बाएं हाथ से अपने पेट को दबाकर और अपने दाहिने हाथ को अपने मुंह पर रखकर चिल्लाए। पाटिल ने बेतुका-सा सवाल पूछा, ‘क्या शरद पवार अब जागे हैं?’ दरअसल, यह उनके स्वभाव में है। कोई अच्छा काम करे, महाराष्ट्र की भलाई के लिए काम करे और कोथरुड के ये बाहरी पाटिल चिल्लाए नहीं, अमूमन ऐसा होता नहीं। इसलिए जैसे ही पवार और ठाकरे बाहर निकले, अपने स्वभाव के अनुसार पाटिल चिल्लाए। ऐसे समय पाटिल चूकते नहीं। उनका सवाल है कि क्या शरद पवार अब जागे हैं? शरद पवार हमेशा जागते रहते हैं। इसलिए राजनीति में वे सही समय को साधते हैं। यही देश का राजनीतिक इतिहास रहा है। भाजपा नेता छह महीने पहले आधी रात को जाग गए। उन्होंने राजभवन में सुबह शपथ समारोह आयोजित किया। लेकिन पवार ने दो दिनों में ही ऐसा धोबीपछाड़ मारा कि गत ६ महीनों से भाजपा वाले सो ही नहीं पाए हैं। वे अपनी आंखें खुली रख रहे हैं और महाराष्ट्र में सत्ता में वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने इस बात का रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया है कि पवार कहां गए, किस समय गए और वे कब जागे? महाराष्ट्र सरकार भी संकट के समय में जाग ही रही है, लेकिन अगर विपक्ष धृतराष्ट्र बन गया है तो उसका क्या करें? उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं दिखता। विपक्ष तुरंत कोंकण में क्षति का मुआयना करने पहुंचा, ये ठीक ही हुआ। भाजपा ने पतरे, तिरपाल, प्लास्टिक आदि सामान कोंकण में पहुंचाया। उन्होंने कोंकण के लोगों को प्रति व्यक्ति १५ हजार रुपए की तत्काल सहायता देने की मांग की। चंद्रकांत पाटिल ने कहा, ‘इस सरकार को तूफान से हुए नुकसान का अनुमान नहीं है। इसलिए सरकार द्वारा घोषित सहायता बहुत कम है। यहां प्रति हेक्टेयर या एकड़ के हिसाब से मुआवजा देना गलत है। नारियल, सुपारी, आम और काजू के पेड़ उखड़ गए हैं। नए पेड़ लगाने के बाद अगले दस साल तक कोई आय नहीं होगी।’ ऐसी गुप्त जानकारी पाटिल ने दी है। क्या सरकार को यह सब नहीं पता? कृषि क्षेत्र ही जिसकी राजनीति की आत्मा हो, ऐसे शरद पवार को किसी के सलाह की आवश्यकता नहीं है। वाजपेयी से लेकर मोदी तक, आज हर कोई पवार के परामर्श पर ऐसे मुद्दों पर निर्णय ले रहा है, लेकिन पाटिल और उनके लोगों द्वारा ये पूछना कि ‘क्या पवार अब जागे हैं?’, एक प्रकार से ये वाजपेयी-मोदी का अपमान है। सांगली की बाढ़ में पाटिल की सरकार कितनी और कैसे जागी थी, सबको पता है। उस समय की सरकार जागते हुए बाढ़ में केवल सेल्फी लेने में मग्न थी। परिणामस्वरूप, बाढ़ पीड़ित इतने उत्तेजित हुए कि उन्होंने विभिन्न स्थानों पर भाजपा के मंत्रियों को रोका और उनसे सवाल-जवाब किया। आखिरकार, जनता ने इन लोगों को घर पर बैठा दिया। पवार जागे हैं या नहीं, ये राज्य की जनता तय करेगी लेकिन क्या संकट के समय में महाराष्ट्र की मदद करने के लिए केंद्र सरकार जाग गई है? पश्चिम बंगाल में तूफान ‘अम्फान’ ने तबाही मचाई। यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी वहां पहुंचे, लेकिन महाराष्ट्र के कोंकण तट पर भी तबाही हुई। प. बंगाल में तूफान आया और महाराष्ट्र में केवल ठंडी हवाएं चलीं, ऐसा तो हुआ नहीं। तो प्रधानमंत्री दो-पांच हजार करोड़ की मदद लेकर महाराष्ट्र क्यों नहीं पहुंचे? और चंद्रकांत पाटिल ने भी केंद्र को क्यों नहीं जगाया? प. बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए वहां केंद्र की नजर है। महाराष्ट्र में कम-से-कम साढ़े चार साल तो विधानसभा चुनाव नहीं होंगे। यह भी स्पष्ट है कि भाजपा को उसके बाद भी यहां सत्ता नहीं मिलेगी। इसलिए उनके लिए कुछ समय के लिए सो जाना ही बेहतर है। संकट के समय में शरद पवार हमेशा जागते हैं। इसलिए विरोधी अकारण चिल्लाकर अपने पेट और गले को नुकसान न पहुंचाएं। ‘निसर्ग’ की आंधी में ‘बाम’ के बक्से भी उड़ गए हैं! चंद्रकांत पाटिल, दर्द में पेट को सेंकते रहिए!!