" /> पाकिस्तानी टिड्डी दल ने जिला प्रशासन को किया परेशान,टिड्डी दल के हमले से बचाव को लेकर हुई बैठक

पाकिस्तानी टिड्डी दल ने जिला प्रशासन को किया परेशान,टिड्डी दल के हमले से बचाव को लेकर हुई बैठक

कोविड-19 महामारी से संघर्ष कर रहे भारत में अब टिड्डियों की घुसपैठ और उनके हमले ने चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के चलते जारी लॉकडाउन को लेकर किसान जहां परेशान रहे, वहीं अब पाकिस्तान की ओर से देश में करोड़ों की संख्या में आये टिड्डियों के दल ने हरियाली से भरी हुई फसलों को बर्बाद करने और भारी आर्थिक क्षति की आशंका बढ़ायी है। टिड्डियों के दल इस अटैक से निबटने के लिए व्यापक स्तर पर कोशिशें जारी हैं।

वाराणसी जनपद को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। किसानों को सचेत रहने की हिदायत देते हुए दवा का छिड़काव करने, थाली आदि पीटने और तेज आवाज में डीजे आदि बजाने के निर्देश दिये गये हैं। डीएम कौशल राज शर्मा के निर्देश पर शुक्रवार को कृषि विभाग के अफसर, तहसील स्टाफ समेत ग्राम प्रधान और लेखपाल व अन्य टीमें दिनभर बैठकें और भागदाैड़़ करते रहेे। हालांकि सुबह 9.30 बजे तक जनपद को सूचना मिल गयी थी कि राजस्थान होकर यूपी में टिड्डियों का दल मीरजापुर व सोनभद्र होकर मध्य प्रदेश के रीवां जिले का रुख कर गया है।

यह सूचना मिलने के बावजूद अधिकारी आशंकित थे कि हवा की दिशा में उड़ने की प्रकृति रखने वाले टिड्डियों का दल कहीं हवा का रूख बनारस की ओर मुड़ गया तो वो कीट इस ओर न आ जायं। क्योंकि शुक्रवार की सुबह तापमान में कमी के साथ तेज हवा चलने और प्रत्येक 20-25 मिनट बाद हवा की दिशा बदलने के कारण वाराणसी में टिड्डियों के हमले की आशंका बनी हुई थी। मौसम विभाग से प्राप्त अनुमान और सूचनाओं के आधार पर हवा का रुख देखते हुए जनपद में आराजी लाइन, सेवापुरी और काशी विद्यापीठ विकास खंड क्षेत्र में टिड्डियों के दल के इंट्री करने का अंदाजा लगाया गया था।इस बार देश में हुए टिड्डियों के हमले में कुछ राहत की बात यह है कि राजस्थान के विभिन्न शहरों में पर्याप्त प्रयासों के चलते टिड्डियों का दल कई झुंडों में बिखर गया। विशेषज्ञों के मुताबिक टिड्डियों के दल जितने अधिक अलग-अलग समूह में होंगे, उनका ग्रुप भी छोटा होता जाएगा और फसलों को नुकसान का खतरा भी अपेक्षाकृत कम रहेगा। एक वर्ग किमी दायरे में एकसाथ उड़ने वाले और एक बार में 150 किमी तक के सफर की क्षमता रखने वाले यह कीट 20-25 मिनट के भीतर अपने दायरे की पूरी फसल चट कर जाते हैं। सिर्फ 90 दिन के जीवनकाल वाले यह टिड्डे यह एक दिन में अपने वजन के बराबर (2 ग्राम) 35 हजार लोगों का भोजन चट करने की क्षमता रखते हैं।

वर्तमान में यूपी में गेहूं की फसलें कट चुकी हैं लेकिन हरियाली वाले आम आदि के पेड़ और सब्जियां खेतों में हैं। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्य के अनुसार आगामी मानसून तक इन कीटों के हमलों की आशंका बनी रहेगी। रेगिस्तानी इलाकों में पैदा होने वाले हरियाली का पीछा करने वाले इन कीटों इनका हमला जारी रहा तो हजारों करोड़ रुपये की फसलों को क्षति पहुंच सकती है।