पाकिस्तानी ‘पीएम’!

हाल के दिनों में दो बेहद जटिल समस्याओं से देश को मुक्ति मिल गई। कल तक ये गंभीर राष्ट्रीय मसले देश के सामने मुंह बाए खड़े थे। एक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद ३७० का मसला था तो दूसरा कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के राजनैतिक भविष्य का। देश ने एक झटके में ही दोनों चिंताओं से निजात पा ली। ३७० का मसला सरकार ने हल कर दिया, तो उस पर अनायास विरोध करके राहुल बाबा का कांग्रेस ने। जिस ‘समस्या’ का समाधान एड़ी-चोटी का बल लगाकर भी कांग्रेस खोज नहीं पा रही थी वो उसे यकायक-अनजाने में ही मिल गया। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में सरकार ने जब से अनुच्छेद ३७० को निष्प्रभावी किया है, राज्य के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की है, तब से एक सुर में विरोधी राग अलापनेवाली कांग्रेस और उसके युवराज पाकिस्तान में इतने लोकप्रिय हुए हैं कि यदि वे आज ही वहां से चुनाव मैदान में उतर जाएं तब भी निश्चित ही प्रचंड जीत हासिल कर लेंगे। इतना ही नहीं वे बहुमत से वहां प्रधानमंत्री भी चुन लिए जाएंगे। जहां तक हिदुस्थान में कांग्रेस का सवाल है तो यहां उसकी कमान मां सोनिया गांधी ने संभाल ही ली है। राहुल बाबा इससे भारमुक्त हो ही गए हैं। अब वे ‘डर’कर नहीं, बल्कि खुलकर राजनीति कर भी रहे हैं। इसी आक्रामक शैली ने ही तो उनके लिए सियासत के ‘अंतर्राष्ट्रीय’ बॉर्डर खोल दिए हैं। आज जिस कदर वे कश्मीर मुद्दे पर मुखर-प्रखर रुख अपनाए हैं उसी से पाकिस्तान में उनकी लोकप्रियता परवान चढ़ रही है। आज वहां राहुल जितने लोकप्रिय हैं उतने तो कभी शायद उनके ‘कायदे आजम’ भी नहीं रहे होंगे। पाकिस्तानियों को अब तो राहुल में ही आशा की नई किरण नजर आ रही है। यही सही मौका है राहुल बाबा के लिए। हिंदुस्थान में तो अगले दो-तीन दशकों तक उनकी दाल गलने से रही, क्यों न एक बार पाकिस्तान में ही जोर आजमाइश हो जाए? पाकिस्तान को वैसे भी एक अदद पाकिस्तान भक्त प्रधानमंत्री की जरूरत है। इमरान खान को लेकर वहां खासी नाराजगी है ही। ऐसे में राहुल बाबा के लिए संभावनाएं अपार हैं। पाकिस्तान तो एक तरह से उन्हें स्वीकृति भी दे चुका है। कश्मीर मसले पर यूएन को दिए पत्र में उसने अपने पीएम के तर्कों से ज्यादा हमारे राहुल बाबा की बातों को तरजीह दी है। और तो और पाकिस्तानी मीडिया हो या नेता, सभी इन दिनों कांग्रेसियों को इस कदर फॉलो कर रहे हैं मानो वे ही उनके सच्चे पथ-प्रदर्शक हों। पाकिस्तानी पब्लिक को नया पीएम चाहिए। उन्हें अब सिलेक्टेड नहीं, इलेक्टेड प्राइम मिनिस्टर चाहिए। तो राहुल बाबा तैयार हो जाओ। इमरान खान की पार्टी पीटी-आई और आपकी पार्टी कांग्रेस-आई अगर भाई-भाई हो जाएं, गठबंधन कर लें तो दोनों का बेड़ा पार ही समझो। पाकिस्तान में आपका भविष्य स्वर्णिम है। आपके अधीर रंजन चौधरी, गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम, शशि थरूर, मणिशंकर अय्यर, कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह भी वहां से आसानी से चुनाव जीत सकते हैं। मंत्रिमंडल तैयार ही है। इमरान की ओर से फवाद चौधरी, शाह महमूद कुरेशी तो हैं ही और हां, वो अंडेवाले मंत्रीजी शेख राशिद भी तो हैं। सभी आपके बड़ेवाले पैâन हैं। ट्विटर पर हौसलाअफजाई भी करते रहते हैं आपकी, नसीहतें भी देते रहते हैं। यहां हिंदुस्थान में तो आपको कोई इतनी गंभीरता से लेता नहीं, इसलिए वहां पाकिस्तान से एक बार सियासी आजमाइश करने में क्या बुराई है? इमरान की पार्टी से गठबंधन न भी हो तो पाकिस्तान में खुद की ‘पाकिस्तानी राष्ट्रीय कांग्रेस’ (पीएनसी) का गठन तो किया ही जा सकता है न। आज नहीं तो कल, वहां पीएम बनने का सपना पूरा हो ही सकता है न।