पाकिस्तान एफ-१६ की काट सुखोई-३०

पाकिस्तान के जिस एफ-१६ विमान ने परसों सुबह भारतीय वायुसेना में घुसपैठ करने की कोशिश की थी उसका सामना भले ही पेट्रोलिंग करते मिग-२१ से हुआ था पर वहां थोड़ी दूरी पर सुखोई ३० भी मौजूद था। रूसी सुखोई-३० पाकिस्तान के पास मौजूद एफ-१६ की काट है। हर मामले में सुखोई बेहतर है। यह इसलिए भी और बेहतर हो जाता है क्योंकि हमारी वायुसेना सुखोई-३० को एडवांस करती रहती है। जबकि पाकिस्तानी एफ-१६ को अमेरिकी मदद बंद हो गई है।
आइए डालते हैं दोनों पर एक नजर। एफ-१६ जहां २२०० किमी की स्पीड पर उड़ता है वहीं सुखोई की टॉप स्पीड २९०० किमी प्रति घंटे तक है। कीमत में देखें तो एफ-१६ ८० के दशक का विमान है और उसके एक यूनिट की कीमत १२५ करोड़ रुपए के आसपास है जबकि सुखोई २०वीं सदी का विमान है और इसकी प्रति यूनिट ३५८ करोड़ रुपए के आसपास है। ये दोनों ही विमान ‘मल्टीरोल कॉम्बेट फाइटर’ श्रेणी के हैं। एफ-१६ की निर्माता अमेरिकी लॉकहीड मॉर्टिन है जबकि सुखोई की किर्माता रूसी इरकुट कॉर्प है जिसके सहयोग से एचएएल में इसका निर्माण हुआ है। सुखोई में ३० एमएम की सिंगल बैरल गन है। ये १५० राउंड फायर कर सकता है। इसमें ६ हवा से हवा में मार कर सकनेवाली मिसाइल लगती है। ब्रह्मोस जैसी दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल हिंदुस्थान के पास है और इसे सुखोई से छोड़ा जा सकता है। इसमें ६ हवा से जमीन पर मार करनेवाली मिसाइल भी लगती है। इसमें ६ लेजर गाइडेड बम भी होते हैं। इसके अलावा ८० अनगाइडेड रॉकेट भी होते हैं। यह कुल मिलाकर ८ टन का पेलोड ले जा सकता है। इससे परमाणु बम भी गिराए जा सकते हैं। इसी तरह एफ-१६ में २ एआईएम-९ मिसाइल और २ एआईएम-१२० मिसाइल लोड की जा सकती है। यह ५०,००० फुट की ऊचाई तक जा सकता है। इसमें एक २० एमएम का गन है जिससे ५०० राउंड फायर किए जा सकते हैं। इसमें कुल ६ हवा से हवा में मार करनेवाली मिसाइल लग सकती है। इसमें गाइडेड बम भी डाले जा सकते हैं। इसके अलावा दोनों ही विमान में उन्नत किस्म के रडार लगे होते हैं।