पाकिस्तान में हिंदुओं पर बढ़ता अत्याचार बना पलायन का कारण

पाकिस्तान में कट्टरपंथियों द्वारा लगातार किए जा रहे अत्याचार के चलते अब हिन्दुओं का जिना मुश्किल हो गया है। पहले जहां पाकिस्तान के पीओके, खैबर, पख्‍तून, बलूच, पेशावर आदि इलाके से हिन्दुओं को भगाया गया, वहीं अब सिंध और पंजाब में अत्याचार की घटनाएं बढ़ गई है। इस सब मामले में वहां की सरकार और मानवाधिकार के लोग चुप्पी साधे हुए हैं। ताजा मामले में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़की का अपहरण हत्या कर दी गई। जिससे इस अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में चिंता फैल गई और उनके पलायन की भी खबरें आ रही हैं।

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के अध्यक्ष जेठानंद डूंगर मल कोहिस्तानी ने गुरुवार को बताया कि सिंध प्रांत के जैकोबाबाद से मंगलवार को नाबालिग लड़की मनीषा कुमारी का अपहरण हो गया। उन्होंने कहा कि सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री कईम अली शाह ने इस मामले का संज्ञान लिया है और उन्होंने प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहन लाल को इस मुद्दे पर गौर करने के लिए जैकोबाबाद जाने को कहा है। कोहिस्तानी ने कहा कि जैकोबाबाद से लड़की के अपहरण तथा पिछले कुछ महीनों में बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों से 11 हिंदू व्यापारियों के अपहरण से हिंदुओं में मन में चिंता घर कर गई है।

उन्होंने कहा कि हिंदुओं में निराशा का माहौल है क्योंकि कानून व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। बिगड़ती स्थिति से न केवल हिंदू बल्कि मुसलमान भी प्रभावित हुए हैं। कुछ टीवी चैनलों ने दावा किया है कि जैकोबाबाद के कुछ हिन्दू परिवारों ने धर्मांतरण, फिरौती और अपहरण के डर से भारत जाने का निर्णय किया है, लेकिन ‘कोहिस्तानी और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के सदस्य अमरनाथ मोटुमल का कहना है कि इन दावों की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं।

हिन्दू पंचायत के प्रमुख बाबू महेश लखानी ने दावा किया है कि कई हिन्दू परिवारों ने हिंदुस्थान जाकर बसने का निर्णय किया है और कई अन्य परिवार इस पर विचार कर रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान में वे असुरक्षित महसूस करते हैं। कुछ हिन्दू नेताओं ने यहां तक दावा किया है कि 60 परिवार हिंदुस्थान जा चुके हैं और इस सप्ताह और परिवार वाघा सीमा होते हुए हिंदुस्थान जाएंगे। हालांकि पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग का कहना है कि वाघा सीमा पर हिन्दुओं की बड़ी संख्या में आने-जाने की कोई सूचना नहीं है।

उन्होंने कहा कि सिंधु नदी की भूमि हमारी मातृभूमि है। कुछ लोग जरूर तीर्थ यात्रा या निजी यात्राओं पर हिंदुस्थान जा रहे होंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बलूचिस्तान के तीन और सिंध के आठ व्यापारी बंधक बने हुए हैं। अभी अपुष्ट सूचनाएं हैं कि बलूचिस्तान के खुजदार से बंधक बनाए गए एक व्यापारी की अपहरणकर्ताओं ने हत्या कर दी है। अमरनाथ मोटुमल ने कहा कि उन्होंने जांच किए हैं और उन्हें वहां से लोगों के भागने का कोई सबूत नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सिंध के सुदूर क्षेत्रों में हिन्दू समुदाय के लोगों पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है, लेकिन उन खबरों कि पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस वजह से वे भाग कर हिंदुस्थान जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं उन दावों की जांच करने गए थे कि लोग भागकर हिंदुस्थान जा रहे हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं मिला है। मोटुमल ने कहा कि ऐसे कुछ परिवार हो सकते हैं जिनका एक सदस्य पहले भारत चला गया हो और बाद में उसने परिवार के अन्य लोगों को भी वहां बुलाया हो। ये परिवार वर्तमान समस्याओं के कारण भाग रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं है।

अमरनाथ मोटुमल ने ‘कट्टरपंथी धार्मिक समूहों’ पर आरोप लगाया है कि वे सिंध में हिन्दू समुदाय के लोगों पर इस्लाम कबूल करने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। इस दबाव के चलते अधिकारियों ने कहा कि सिंध और बलूचिस्तान से हिन्दू परिवार 30 दिन के वीजा पर तीर्थ यात्रा के लिए हरिद्वार जाते हैं। मीडिया का एक हिस्सा इसे गलत तरीके से देश छोड़कर भागना बता रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को फिरौती और अपहरण का निशाना बनाया जा रहा है लेकिन स्थिति यह है कि सामान्य शिया, हिन्दू, सिंधी सुरक्षित हैं। पिछले दो वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार, अपराधियों और उग्रवादियों का निशाना बनने के बाद बलुचिस्तान और सिंध से दर्जनों हिन्दू परिवार भागकर भारत चले गए हैं। हिन्दुओं को अपहरण के कई बड़े मामलों और महिलाओं के जबरन धर्मांतरण के मामले भी झेलने पड़े हैं।