पानी किल्लत का असर माफियाओं पर खाड़ी के पानी से बन रही शराब

पानी की किल्लत का असर शराब माफियाओं पर भी पड़ने लगा है। अब शराब माफिया पेयजल की जगह खाड़ी के गंदे एवं खारे पानी से शराब बनाने का काम कर रहे हैं। शराब माफियाओं पर लगातार की जा रही छापेमारी में इस बात का खुलासा हुआ है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार डायघर परिसर का छोटा तथा बड़ा देसाई गांव खाड़ी के किनारे स्थित है। इस गांव के रहनेवाले कई बड़े एवं दबंग किस्म के शराब माफिया पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए खाड़ी किनारे स्थित घने मैंग्रोव्ज के बीचों-बीच शराब की भट्ठियां चलाते हैं और बड़े पैमाने पर ठाणे तथा मुंबई के विभिन्न उपनगरों में इसकी आपूर्ति करते हैं। शराब बनाने में गुड़, नौसादर तथा अन्य कई रासायनिक सामग्रियों को मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद भट्ठियों में इसे पकाकर शराब तैयार की जाती है। शराब बनाते समय पानी के लिए टैंक रखे जाते हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा असम में देशी शराब पीकर हुई सैकड़ों लोगों की मौत के मामले को ठाणे पुलिस ने गंभीरता से लिया है। शराब माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातर छापेमारी कर रही है। २० दिन के अंदर की गई तीन छापेमारी में पुलिस ने करीब १५० ड्रम कच्ची शराब बरामद की है और कुल ६ भट्ठियों को नष्ट किया है। पुलिस छापेमारी में इस बात का खुलासा हुआ है कि शराब माफिया शराब बनाने में अब पेयजल की जगह खाड़ी के गंदे तथा खारे पानी का उपयोग करने लगे हैं। यह बेहद खतरनाक है। उल्लेखनीय है कि दिवा तथा मुंब्रा परिसर के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। छोटा तथा बड़ा देसाई गांव का संबंध परोक्ष एवं अपरोक्ष रूप से इन्हीं दोनों प्रभाग समितियों से है।
 २० दिन के अंदर तीन छापेमारी
 १५० ड्रम कच्ची शराब बरामद
 ६ भट्ठियों को किया नष्ट