" /> पान की गुमटी विवाद में फंसे बीजेपी नेता, हुए गिरफ्तार, रिहा !

पान की गुमटी विवाद में फंसे बीजेपी नेता, हुए गिरफ्तार, रिहा !

• चौक स्थित रामजानकी मंदिर के सामने दशकों से थी बीजेपी नेता के पिता की पान की गुमटी, मंदिर प्रबंधन के गुमटी हटवाने पर विवाद गहराया।

भाजपा सत्ता में है पर यूपी पुलिस बीजेपी नेताओं को नहीं सेंटती। मंगलवार को इसकी बानगी देखने को मिली सुल्तानपुर शहर में। तीन बार से लगातार पालिका सभासद हो रहे भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष व पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ क्षेत्रीय मंत्री (काशी प्रांत) दिनेश चौरसिया के पिता की रामजानकी मंदिर के चबूतरे पर रखी दशकों पुरानी गुमटी मंदिर की देखरेख करने वाली महिला ने फेंकवा दी। जब भाजपा नेता उसे रोकने गए तो नगर कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया। रोचक तो ये है कि जब ये वाकया घटित हो रहा था तो पार्टी के कई जिम्मेदार नेताओं ने पीड़ित नेता फोन करते रहे , पर किसी ने उनका फोन तक नहीं उठाया।

घटनाक्रम यूं है। सुल्तानपुर चौक में दशकों पुराना रामजानकी मंदिर है। जिसके सामने चबूतरे के पास भाजपा नेता दिनेश चौरसिया के दादा स्व. राम प्रसाद चौरसिया व पिता स्व. विश्वनाथ चौरसिया करीब ९० वर्षों से पान की दुकान गुमटी में रखते थे। पालिका में 70 वर्षों से यह गुमटी दर्ज है। जिसकी किराए की रसीद आदि भी चौरसिया के पास है। विवाद उस वक़्त मंगलवार को शुरू हुआ जब उस जर्जर गुमटी को मंदिर की देखरेख करने वाली महिला मीना गुप्ता ने जबरन हटवा दी। भाजपा नेता को जानकारी मिली तो वे उसे मौके पर जा पहुंचे। घंटाघर चौकी पुलिस के प्रभारी विजय गुप्ता भी दलबल से पहुंच गए और पीड़ित को कोतवाली पहुंचने को कहा। इस पर पीड़ित चौरसिया साथी भाजपाइयों सभासद बिन्नू पांडेय , पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि अजय जायसवाल आदि के साथ नगर कोतवाल ओमवीर सिंह चौहान से मिलने कोतवाली पहुंचे।..लेकिन चौकी इंचार्ज विजय गुप्ता ने शांतिभंग सहित विभिन्न धाराओं में भाजपा नेता को दिनेश चौरसिया को आरोपित कर केस दर्ज कर लिया। यही नहीं पालिकाध्यक्ष बबिता जायसवाल, एमएलए सूर्यभान सिंह आदि द्वारा सच बताने के बावजूद उन्हें कस्टडी में भी ले लिया। अंततः सिटी मजिस्ट्रेट से जमानत पर देर शाम पीड़ित भाजपा नेता जमानत पर रिहा हो सके। सत्ताधारी दल की इस प्रकरण से हुई फजीहत को लेकर जिले का सियासी माहौल फिलहाल गरम हो गया है। पार्टी कार्यकर्ता व नेता भी दोफाड़ हो गए हैं। प्रकरण को लेकर मंदिर की संपत्ति पर एक प्रॉपर्टी डीलर की निगाह होने की बात चर्चा में है।